आमेर का इतिहास 4
राजस्थान के इतिहास में सवाई जयसिंह द्वितीय (Sawai Jai Singh II) का नाम अत्यंत गौरवपूर्ण और महत्वपूर्ण है। इन्हें जयपुर शहर का संस्थापक और आमेर राज्य के सबसे महान शासकों में गिना जाता है। इनके शासनकाल में राजनीति, स्थापत्य, विज्ञान और संस्कृति का अद्भुत विकास हुआ।
सवाई जयसिंह न केवल एक वीर योद्धा थे, बल्कि वे एक महान खगोलशास्त्री, नगर नियोजक और सुधारक भी थे। उन्होंने भारत में आधुनिक शहर जयपुर की स्थापना की, जो आज भी अपनी वैज्ञानिक योजना और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
यह लेख सवाई जयसिंह द्वितीय का इतिहास को सरल और परीक्षा उपयोगी भाषा में प्रस्तुत करता है, जिसमें उनके जीवन, युद्ध, संधियाँ, स्थापत्य कार्य और सामाजिक सुधारों की पूरी जानकारी दी गई है।
सवाई जयसिंह द्वितीय (1700–1743 ई.)
परिचय और प्रारंभिक जीवन
-
वास्तविक नाम: विजयसिंह
- कम उम्र में ही आमेर के शासक बने
- लगभग 46 वर्षों तक शासन किया
- आमेर का सर्वाधिक विकास इनके समय हुआ
उपाधियाँ और सम्मान
प्रमुख उपाधियाँ
- ‘सवाई’ – औरंगजेब द्वारा
- ‘राजराजेश्वर महाराजाधिराज’ – मुहम्मदशाह रंगीला द्वारा
- ‘ज्योतिष राजा’ – इतिहासकार जदुनाथ सरकार द्वारा
👉 ‘सवाई’ का अर्थ है – एक से सवा गुना श्रेष्ठ
मुगल राजनीति में भूमिका
उत्तराधिकार संघर्ष
- आजम शाह का समर्थन किया
- बहादुरशाह प्रथम (मुअज्जम) विजयी हुआ
परिणाम
- 1707 में आमेर को खालसा घोषित किया गया
- आमेर का नाम बदलकर मोमिनाबाद/इस्लामाबाद रखा गया
पुनः सत्ता प्राप्ति
- 1708 में देबारी समझौते के माध्यम से आमेर पर पुनः अधिकार
जयपुर की स्थापना (1727 ई.)
नई राजधानी क्यों बनाई गई?
- आमेर में जनसंख्या बढ़ रही थी
- पानी की कमी
- सुरक्षा कारण
जयपुर शहर की विशेषताएँ
- 18 नवम्बर 1727 को स्थापना
- भारत का पहला आधुनिक नियोजित शहर
- नौ खंडों (Grid System) में बसाया गया
मुख्य योजनाकार
- पंडित विद्याधर भट्टाचार्य
जयपुर के प्रमुख निर्माण
महत्वपूर्ण स्थल
- सिटी पैलेस (चन्द्रमहल सहित)
- गोविन्द देव जी मंदिर
- नाहरगढ़ किला
- जल महल
- जयगढ़ किला
विशेष तथ्य
-
जयगढ़ में ‘जयबाण’ तोप बनाई गई
- नाहरगढ़ को “जयपुर का प्रहरी” कहा जाता है
वेधशालाएँ (Jantar Mantar)
भारत में 5 वेधशालाएँ
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जयपुर
- दिल्ली
- उज्जैन
- वाराणसी
- मथुरा
विशेष उपकरण
- सम्राट यंत्र (सूर्य घड़ी)
- राम यंत्र
👉 जयपुर का जंतर-मंतर विश्व धरोहर (UNESCO) में शामिल है
मराठों के साथ संबंध
मुख्य युद्ध
| युद्ध | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|
| पीलसूद | 1715 | जयसिंह विजयी |
| मंदसौर | 1733 | मराठा विजयी |
| रामपुरा | 1735 | मराठा विजयी |
धौलपुर समझौता (1741)
- पेशवा बालाजी बाजीराव के साथ
हुरड़ा सम्मेलन (1734 ई.)
उद्देश्य
-
मराठों के विरुद्ध एकजुट होना
भाग लेने वाले शासक
- मेवाड़ – जगत सिंह द्वितीय
- जयपुर – सवाई जयसिंह
- मारवाड़ – अभयसिंह
परिणाम
- सम्मेलन असफल रहा
जयपुर-बूंदी विवाद
घटनाक्रम
-
बूंदी पर अधिकार करने का प्रयास
- मराठों का हस्तक्षेप
- राजस्थान में मराठों का प्रवेश
👉 यह घटना परीक्षा में महत्वपूर्ण है
सांस्कृतिक और साहित्यिक योगदान
प्रमुख ग्रंथ
- जयसिंह कारिका
- जिज मोहम्मद शाही
अनुवाद कार्य
- यूक्लिड की ज्यामिति का संस्कृत अनुवाद
दरबारी विद्वान
- श्रीकृष्ण भट्ट
- कवि कलानिधि
सामाजिक सुधार
- सती प्रथा पर रोक लगाने का प्रयास
- बाल विवाह का विरोध
- अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा
- ब्राह्मणों में भेदभाव समाप्त
Quick Revision Table (महत्वपूर्ण सार)
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| शासनकाल | 1700–1743 |
| राजधानी | जयपुर (1727) |
| वेधशालाएँ | 5 |
| सम्मेलन | हुरड़ा (1734) |
| संधि | धौलपुर (1741) |
Exam Important Points (परीक्षा के लिए)
- जयपुर शहर के संस्थापक
- जंतर-मंतर का निर्माण
- हुरड़ा सम्मेलन
- मराठों से युद्ध
- ‘सवाई’ उपाधि
Conclusion
सवाई जयसिंह द्वितीय का शासनकाल राजस्थान के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने न केवल एक आधुनिक शहर जयपुर की स्थापना की, बल्कि विज्ञान, खगोलशास्त्र और संस्कृति को भी नई दिशा दी।
उनकी दूरदर्शिता, प्रशासनिक क्षमता और वैज्ञानिक सोच उन्हें अन्य शासकों से अलग बनाती है।
यदि आप सवाई जयसिंह द्वितीय का इतिहास (Sawai Jai Singh II History) अच्छे से समझ लेते हैं, तो राजस्थान इतिहास के कई महत्वपूर्ण प्रश्न आसानी से हल कर सकते हैं।
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