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महाराणा राजसिंह का इतिहास

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By NotesMind

महाराणा जगतसिंह प्रथम की मृत्यु के बाद 1652 ई. में उनके पुत्र महाराणा राजसिंह मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। उनका शासनकाल मुगलों के प्रति 'प्रतिरोध की नीति' और स्थापत्य कला के 'सृजन' का अनूठा संगम है। जहाँ पिछले शासकों ने मुगलों से संधि को प्राथमिकता दी थी, वहीं राजसिंह ने मेवाड़ के खोये हुए गौरव और स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करने का साहसिक प्रयास किया।


1. महाराणा राजसिंह का संक्षिप्त परिचय (Quick Profile)

  • शासनकाल: 1652 से 1680 ई.

  • राज्याभिषेक: 10 अक्टूबर 1652

  • उपाधि: "विजय कटकातु" (सेनाओं को जीतने वाला)

  • मुख्य शत्रु: मुगल सम्राट औरंगजेब


2. औरंगजेब से संघर्ष: धार्मिक और राजनीतिक कारण

महाराणा राजसिंह और औरंगजेब के बीच संघर्ष केवल सत्ता का नहीं, बल्कि सिद्धांतों का था।

औरंगजेब के विरोध के प्रमुख बिंदु:

  1. चित्तौड़गढ़ की मरम्मत: मुगल-मेवाड़ संधि (1615) के विरुद्ध जाकर राजसिंह ने चित्तौड़ के किले की मरम्मत करवाई। औरंगजेब ने सादुल्ला खाँ के नेतृत्व में सेना भेजकर इसे ढहा दिया, जिससे कड़वाहट बढ़ गई।

  2. जजिया कर का विरोध (1679): जब औरंगजेब ने हिंदुओं पर 'जजिया कर' लगाया, तब राजसिंह ने उसे एक कड़ा पत्र लिखकर इसका विरोध किया।

  3. धार्मिक संरक्षण: औरंगजेब द्वारा मंदिरों को तोड़े जाने के समय, राजसिंह ने मथुरा से आई श्रीनाथजी (नाथद्वारा) और द्वारकाधीश (कांकरोली) की मूर्तियों को मेवाड़ में स्थापित करवाकर उन्हें संरक्षण दिया।

  4. राजकुमारी चारुमती विवाह प्रसंग (1660): किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमती से औरंगजेब जबरन विवाह करना चाहता था। राजसिंह ने चारुमती की पुकार पर औरंगजेब से युद्ध मोल लेकर उनसे विवाह किया, जो मुगलों के लिए एक बड़ी राजनीतिक हार थी।


3. सिसोदिया-राठौड़ गठबंधन और रणनीतिक कौशल

राजसिंह ने महसूस किया कि मुगलों को हराने के लिए एकजुटता आवश्यक है।

  • मारवाड़ की सहायता: औरंगजेब द्वारा मारवाड़ को हड़पने की कोशिश के दौरान, राजसिंह ने वीर दुर्गादास राठौड़ और राजकुमार अजीत सिंह को मेवाड़ में शरण दी और उन्हें 'केलवा की जागीर' प्रदान की।

  • सैन्य अभियान: उन्होंने 'टीका दौड़' (एक पारंपरिक सैन्य अभियान) के बहाने मुगलों के कई थानों पर अधिकार कर लिया।


4. स्थापत्य कला और जनहित कार्य

महाराणा राजसिंह एक महान निर्माता थे। उनके द्वारा निर्मित संरचनाएँ आज भी राजस्थान की शान हैं।

राजसमंद झील (Rajsamand Lake)

अकाल राहत कार्य के तहत उन्होंने 1662-1676 के बीच गोमती नदी के पानी को रोककर इस विशाल झील का निर्माण करवाया।

राजप्रशस्ति (Raj Prashasti): विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख

राजसमंद झील की 'नौचौकी' पाल पर 25 काली शिलाओं पर संस्कृत भाषा में राजप्रशस्ति उत्कीर्ण है।

  • लेखक: रणछोड़ भट्ट तैलंग।

  • सामग्री: इसमें बप्पा रावल से लेकर राजसिंह तक का इतिहास और झील निर्माण का विवरण मिलता है।

प्रमुख मंदिर निर्माण:

  • श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा): पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख केंद्र।

  • द्वारकाधीश मंदिर (कांकरोली): धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र।

  • अंबा माता मंदिर: उदयपुर में स्थापत्य का सुंदर उदाहरण।


5. हाड़ी रानी का बलिदान: "चूंडावत माँगी सैंणाणी, सिर काट दे दियो क्षत्राणी"

राजसिंह के काल में ही सलूम्बर के राव रतन सिंह चूंडावत और उनकी पत्नी हाड़ी रानी (सहैल कंवर) का अमर बलिदान हुआ। युद्ध पर जाते समय जब रतन सिंह ने रानी से कोई निशानी माँगी, तो रानी ने मोह बंधन काटकर अपना सिर ही भेंट कर दिया ताकि पति कर्तव्य पथ से विचलित न हो।


6. दरबारी विद्वान और साहित्य (Table)

महाराणा राजसिंह साहित्य के महान संरक्षक थे।

विद्वान प्रमुख रचना
रणछोड़ भट्ट राजप्रशस्ति, अमर काव्य वंशावली
सदाशिव भट्ट राजरत्नाकर
किशोरदास राजप्रकाश
मुकुंद राजसिंहाष्टक

 एग्जाम के लिए महत्वपूर्ण 'Key Points' (Exam Digest)

  1. विजय कटकातु: राजसिंह की सैन्य उपाधि।

  2. जजिया कर पत्र: औरंगजेब को पत्र लिखकर कर का विरोध करने वाला एकमात्र राजपूत शासक।

  3. 1660 का विवाह: किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमती से विवाह कर औरंगजेब की प्रतिष्ठा को चोट पहुँचाई।

  4. राजप्रशस्ति: 25 सर्गों में विभाजित, संस्कृत का सबसे बड़ा शिलालेख।

  5. टीका दौड़: मुगलों के विरुद्ध गुप्त सैन्य अभियान।


निष्कर्ष (Conclusion)

महाराणा राजसिंह का इतिहास वीरता, कूटनीति और कलात्मक दृष्टि का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने एक ओर जहाँ औरंगजेब की विशाल सेना का डटकर मुकाबला किया, वहीं दूसरी ओर अकाल के समय प्रजा के लिए राजसमंद जैसी झील बनवाकर 'लोक-कल्याण' की मिसाल पेश की। राजस्थान के इतिहास में राजसिंह को एक ऐसे शासक के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया।

महाराणा राजसिंह प्रथम — महत्वपूर्ण FAQs

Q1. महाराणा राजसिंह प्रथम का शासनकाल क्या था?
उत्तर: महाराणा राजसिंह प्रथम का शासनकाल 1652 से 1680 ई. तक था।

Q2. महाराणा राजसिंह का राज्याभिषेक कब हुआ?
उत्तर: 10 अक्टूबर 1652 ई. को।

Q3. महाराणा राजसिंह की प्रमुख सैन्य उपाधि क्या थी?
उत्तर: 'विजय कटकातु'

Q4. महाराणा राजसिंह का प्रमुख मुगल शत्रु कौन था?
उत्तर: मुगल सम्राट औरंगजेब

Q5. महाराणा राजसिंह ने चित्तौड़गढ़ के संबंध में क्या किया?
उत्तर: उन्होंने मुगल-मेवाड़ संधि (1615) की शर्तों के विरुद्ध चित्तौड़गढ़ दुर्ग की मरम्मत करवाने का प्रयास किया।

Q6. चित्तौड़ की मरम्मत के विरुद्ध औरंगजेब ने किसे भेजा?
उत्तर: सादुल्ला खाँ के नेतृत्व में मुगल सेना भेजी गई।

Q7. महाराणा राजसिंह ने जजिया कर का विरोध कब किया?
उत्तर: 1679 ई. में औरंगजेब द्वारा जजिया लगाए जाने पर महाराणा राजसिंह ने उसका विरोध किया।

Q8. महाराणा राजसिंह ने औरंगजेब को किस मुद्दे पर पत्र लिखा था?
उत्तर: उन्होंने जजिया कर के विरोध में औरंगजेब को पत्र लिखा था।

Q9. महाराणा राजसिंह ने किन प्रमुख देव प्रतिमाओं को संरक्षण दिया?
उत्तर: उन्होंने श्रीनाथजी और द्वारकाधीश की प्रतिमाओं को मेवाड़ में संरक्षण दिया।

Q10. श्रीनाथजी की प्रतिमा कहाँ स्थापित की गई?
उत्तर: नाथद्वारा में।

Q11. द्वारकाधीश की प्रतिमा कहाँ स्थापित की गई?
उत्तर: कांकरोली में।

Q12. राजकुमारी चारुमती का संबंध किस राज्य से था?
उत्तर: किशनगढ़ से।

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