राजस्थान के प्रमुख मंदिर जैन और सूर्य मंदिर | GK
राजस्थान के प्रमुख मंदिर और उनकी शिल्पकला — एक संपूर्ण गाइड
राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में मंदिरों का विशेष स्थान है। इस लेख में हम राजस्थान के प्रमुख मंदिरों के इतिहास, निर्माणकर्ता, स्थापत्य शैली और धार्मिक महत्व को विस्तार से समझेंगे — जो RPSC, पटवारी और अन्य सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।
इस लेख में आप सीखेंगे: राजस्थान का पहला तिथि अंकित मंदिर कौन सा है, मेवाड़ के कुल देवता कौन हैं, और श्रीनाथजी की मूर्ति मथुरा से राजस्थान कैसे पहुँची।
1. झालरापाटन का शीतलेश्वर महादेव मंदिर — राजस्थान का प्रथम तिथि अंकित मंदिर
ऐतिहासिक
राजस्थान में सबसे पहले तिथि अंकित मंदिर का गौरव झालरापाटन के शीतलेश्वर महादेव मंदिर को प्राप्त है। यहाँ से प्राप्त शिलालेख पर 689 ईस्वी की तिथि अंकित है, जिससे यह राजस्थान का सबसे प्राचीन तिथि-प्रमाणित मंदिर बनता है।
- स्थान: झालरापाटन, झालावाड़
- शिलालेख तिथि: 689 ईस्वी
- विशेषता: राजा का नाम शिलालेख पर अंकित नहीं है
2. सहस्त्रबाहु मंदिर (सास-बहू मंदिर), नागदा — उदयपुर
वैष्णव
उदयपुर जिले के नागदा में स्थित यह मंदिर भगवान सहस्त्रबाहु विष्णु को समर्पित है। नागदा 1241 ई. तक गुहिल वंश की राजधानी थी और इस मंदिर का निर्माण 10वीं सदी में किसी गुहिल शासक ने करवाया था।
- स्थान: नागदा, उदयपुर
- निर्माण काल: 10वीं सदी (गुहिल शासक)
- प्रकार: वैष्णव मंदिर
- रोचक तथ्य: "सहस्त्रबाहु" का अपभ्रंश होकर स्थानीय भाषा में "सास-बहू" हो गया — इसी नाम के कारण यह मंदिर प्रसिद्ध है।
3. बाड़ोली शिव मंदिर — कोटा
शैव
कोटा के निकट बिंदोली कस्बे में स्थित यह मंदिर परमार शासक मलयवर्मन द्वारा निर्मित है, जो भगवान शिव के परम भक्त थे। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
- स्थान: बिंदोली (कोटा के पास)
- निर्माणकर्ता: परमार शासक मलयवर्मन
- स्थापत्य शैली: नागर शैली + पंचायतन शैली का मिश्रण
- प्रकार: शिव मंदिर
4. एकलिंगजी मंदिर — उदयपुर (मेवाड़ के कुल देवता)
पाशुपत संप्रदाय
उदयपुर जिले में स्थित एकलिंगजी मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में बप्पा रावल ने करवाया था। यह पाशुपत संप्रदाय का मंदिर है और मेवाड़ के शासकों के कुल देवता हैं।
- स्थान: उदयपुर जिला
- निर्माणकर्ता: बप्पा रावल (8वीं सदी)
- संप्रदाय: पाशुपत
- महत्व: मेवाड़ शासक स्वयं को एकलिंग महादेव का सेवक और दीवान मानते थे — इसीलिए एकलिंग महादेव को मेवाड़ का वास्तविक शासक कहा गया।
5. करणी माता मंदिर — देशनोक, बीकानेर
लोक देवी
बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता मंदिर का निर्माण बीकानेर के शासक महाराजा गंगासिंह ने करवाया था। यह मंदिर "चूहों का मंदिर" के नाम से भी प्रसिद्ध है।
- स्थान: देशनोक, बीकानेर
- निर्माणकर्ता: महाराजा गंगासिंह (जोधपुर राठौड़)
- प्रसिद्धि: करणी माता ने शासकों को आश्रय दिया था; यहाँ हजारों काले चूहे (काबा) पवित्र माने जाते हैं।
6. श्रीनाथ मंदिर — नाथद्वारा, राजसमंद
वैष्णव (पुष्टिमार्ग)
नाथद्वारा, राजसमंद में स्थित यह मंदिर 1671-72 में मेवाड़ के महाराणा राजसिंह द्वारा निर्मित कराया गया। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण की बालस्वरूप में मूर्ति स्थापित है।
- स्थान: नाथद्वारा, राजसमंद
- निर्माणकर्ता: महाराणा राजसिंह (1671-72)
- महत्व: भारत का प्रमुख वैष्णव संप्रदाय केंद्र
- ऐतिहासिक तथ्य: 1669 में औरंगजेब के हिंदू मंदिर ध्वस्त करने के फरमान के बाद, श्रीकृष्ण की मूर्ति को मथुरा से यहाँ लाकर सुरक्षित स्थापित किया गया।
राजस्थान के प्रमुख जैन मंदिर और सूर्य मंदिर — संपूर्ण जानकारी
राजस्थान में जैन धर्म और सूर्य उपासना की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। इस लेख में हम राजस्थान के प्रमुख जैन तीर्थ स्थलों और ऐतिहासिक सूर्य मंदिरों की विस्तृत जानकारी देंगे, जो RPSC, पटवारी, ग्राम सेवक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस लेख में आप जानेंगे: रणकपुर मंदिर में कितने स्तम्भ हैं, दिलवाड़ा मंदिर किसने बनवाया, नाकोड़ा तीर्थ की विशेषता क्या है और राजस्थान के प्रमुख सूर्य मंदिर कहाँ-कहाँ स्थित हैं।
भाग 1: राजस्थान के प्रमुख जैन तीर्थ स्थल
जैन धर्म
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान में लगभग 3500 वर्षों से जैन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक गतिविधियाँ होती आ रही हैं। यहाँ के जैन मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि उत्कृष्ट शिल्पकला के भी अद्भुत उदाहरण हैं।
1. रणकपुर जैन मंदिर — 1444 स्तम्भों का चमत्कार
विश्व प्रसिद्ध
अरावली पर्वतमाला के मध्य स्थित रणकपुर राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध जैन तीर्थ है। इस मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में धरणाशाह पोरवाल ने करवाया था।
- देवता: भगवान आदिनाथ (प्रथम तीर्थंकर)
- स्तम्भ: लगभग 1444 — प्रत्येक की नक्काशी अलग-अलग
- निर्माणकर्ता: धरणाशाह पोरवाल
- काल: 15वीं शताब्दी
2. दिलवाड़ा जैन मंदिर — माउंट आबू
संगमरमर शिल्प
माउंट आबू स्थित दिलवाड़ा मंदिर संगमरमर की उत्कृष्ट नक्काशी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ पाँच प्रमुख जैन मंदिर हैं।
- विमलवसही मंदिर: निर्माण 1031 ई. में गुजरात के चालुक्य शासक भीमदेव के मंत्री विमलशाह द्वारा। शिल्पकार कीर्तिधर के नेतृत्व में ~1500 कारीगरों ने बनाया। इसमें 57 देवकुलिकाएँ हैं।
- लूणवसही मंदिर: 1287 ई. में वास्तुपाल और तेजपाल द्वारा निर्मित। भगवान नेमिनाथ को समर्पित। नक्काशी अत्यंत अद्भुत है।
3. श्रीमहावीरजी — प्रदेश का प्रमुख जैन तीर्थ
प्रमुख तीर्थ
- स्थान: दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गम्भीरी नदी के तट पर
- दिल्ली-मुंबई मार्ग पर स्थित होने से देश-विदेश से यात्री आते हैं
- भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा स्थापित है
4. नाकोड़ा तीर्थ — बालोतरा (बाड़मेर)
पहाड़ी तीर्थ
- स्थान: बालोतरा रेलवे जंक्शन से 7 किमी पश्चिम
- भगवान पार्श्वनाथ की प्राचीन मूर्ति स्थापित
- 1511 ई. में पुनर्निर्माण किया गया
- विशेष: यहाँ भैरव जी की पूजा विशेष रूप से होती है
5. ऋषभदेव (केसरियाजी) — उदयपुर
त्रि-धर्म आस्था
- स्थान: उदयपुर से ~64 किमी, कोयल नदी के किनारे
- काले पत्थर की प्रतिमा; केसर चढ़ाने की परंपरा से "केसरियाजी" नाम प्रसिद्ध
- हिंदू, जैन और आदिवासी — तीनों समुदायों की आस्था का केंद्र
- आदिवासी समाज इन्हें कालिया बाबा कहते हैं
6. ओसियां — जोधपुर की प्राचीन धार्मिक नगरी
स्थापत्य कला
- स्थान: जोधपुर से ~58 किमी, पश्चिमी राजस्थान
- महावीर स्वामी का जैन मंदिर + अनेक हिंदू मंदिर
- स्थापत्य कला की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल
7. लोद्रवा — जैसलमेर
प्राचीन राजधानी
- भगवान पार्श्वनाथ का प्रसिद्ध जैन मंदिर
- मंदिर स्थापना: 1263 ई. में मानी जाती है
- लोद्रवा कभी भाटी राजाओं की राजधानी रहा
- पत्थर की नक्काशी और स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध
8. अन्य प्रमुख जैन केंद्र
| स्थान | जिला | विशेषता |
|---|---|---|
| पदमपुरा-गाड़ा | जयपुर (~35 किमी) | भूमि से प्रकट पार्श्वनाथ प्रतिमा, स्थापना 1945 |
| तिजारा | अलवर (~50 किमी) | विशाल जैन मंदिर, प्रमुख तीर्थस्थल |
| मालपुरा-दादाबाड़ी | टोंक | विशाल श्वेताम्बर जैन मंदिर |
| चूलगिरी | जयपुर (~6 किमी) | 400 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित मंदिर |
| सिरियारी | पाली | तेरापंथ सम्प्रदाय की स्थापना स्थली |
| जैन विश्व भारती | लाडनूं | आचार्य तुलसी द्वारा स्थापित, जैन शिक्षा केंद्र |
भाग 2: राजस्थान के प्रमुख सूर्य मंदिर
सूर्य उपासना
राजस्थान में सूर्य उपासना की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। प्रतिहार काल में यहाँ सूर्य मंदिर स्थापत्य का विशेष विकास हुआ।
| मंदिर | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| चन्द्रभागा सूर्य मंदिर | झालरापाटन | स्थापत्य और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण |
| सूर्य मंदिर (सात सहेलियों का मंदिर) | झालावाड़ | मूर्तिकला और स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध |
| ओसियां सूर्य मंदिर | जोधपुर (~58 किमी) | प्राचीनकालीन, प्रतिहार स्थापत्य का उदाहरण |
| हर्षनाथ मंदिर | सीकर | प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर |
| बड़ोली का सूर्य मंदिर | कोटा (~14 किमी पूर्व) | घटेश्वर शिव मंदिर समूह में, पंचायत शैली |
| तलेवाड़ा सूर्य मंदिर | बाँसवाड़ा (~15 किमी) | 11वीं शताब्दी, शिलालेख प्राप्त |
| भीनमाल सूर्य मंदिर | जालोर (भीनमाल) | अब खंडहर शेष; ब्रह्मा मंदिर के रूप में भी प्रसिद्ध |
| गलता जी क्षेत्र | जयपुर | सूर्य उपासना से जुड़े प्राचीन मंदिर |
जयपुर जिला
Sun Temple, Amer सूर्य मंदिर
आमेर, जयपुर
जयपुर जिले के ऐतिहासिक आमेर क्षेत्र में स्थित यह सूर्य मंदिर प्राचीन सूर्य उपासना परंपरा का प्रतीक है। आमेर दुर्ग के समीप होने के कारण यह पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ सूर्य देव की मूर्ति स्थापित है और प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है।
Shila Devi Temple शक्ति पीठ
आमेर, जयपुर
आमेर किले के भीतर स्थित शिला देवी मंदिर आमेर के कछवाहा राजवंश की कुल देवी का मंदिर है। राजा मान सिंह प्रथम ने बंगाल विजय के पश्चात यहाँ देवी की प्रतिमा स्थापित करवाई थी। नवरात्रि में यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं।
Jagat Shiromani Temple वैष्णव
आमेर, जयपुर
आमेर में स्थित जगत शिरोमणि मंदिर 17वीं सदी में कनकावती (राजा मान सिंह प्रथम की रानी) ने अपने पुत्र जगत सिंह की स्मृति में बनवाया था। यह मंदिर मीराबाई की श्रीकृष्ण प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। इसकी नागर शैली की स्थापत्य कला अत्यंत आकर्षक है।
Govind Dev Ji Temple वैष्णव
जयपुर (सिटी पैलेस परिसर)
जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में स्थित गोविन्द देवजी मंदिर राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण वैष्णव तीर्थ है। यहाँ स्थापित श्रीकृष्ण की प्रतिमा मूलतः वृंदावन से लाई गई थी। जयपुर के महाराजा इस मंदिर के प्रमुख संरक्षक रहे हैं।
Galta Ji Temple (Monkey Temple) तीर्थ
जयपुर
जयपुर से लगभग 10 किमी दूर अरावली पहाड़ियों में स्थित गलता जी एक प्राचीन हिंदू तीर्थ है। यहाँ प्राकृतिक जलकुंड, मंदिर समूह और हजारों बंदरों के कारण इसे "मंकी टेम्पल" भी कहते हैं। सूर्य उपासना और तीर्थ स्नान के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है।
Lakshmi Narayan Temple (Birla Mandir) वैष्णव
जयपुर
जयपुर में मोती डूंगरी के निकट स्थित यह मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है। बिड़ला परिवार द्वारा निर्मित इस मंदिर में भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की भव्य प्रतिमाएँ स्थापित हैं। रात्रि में रोशनी से जगमगाता यह मंदिर जयपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल है।
Narsingh Temple वैष्णव
आमेर, जयपुर
आमेर में स्थित नरसिंह मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित है। यह मंदिर आमेर के प्राचीन मंदिर समूह का हिस्सा है और कछवाहा राजवंश की आस्था से जुड़ा हुआ है। यहाँ की मूर्तिकला मध्यकालीन राजस्थानी शिल्प का सुंदर उदाहरण है।
Bihari Temple वैष्णव
आमेर, जयपुर
आमेर में स्थित बिहारी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण (बिहारी जी) को समर्पित है। यह मंदिर वैष्णव भक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। आमेर के अन्य ऐतिहासिक मंदिरों के साथ यह भी तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
Tadkeshwar Temple शैव
जयपुर
जयपुर में स्थित ताड़केश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। सावन माह में यहाँ विशेष पूजा-अर्चना और मेले का आयोजन होता है।
उदयपुर जिला
Saas Bahu Temple (सहस्त्रबाहु) वैष्णव
नागदा, उदयपुर
उदयपुर जिले के नागदा में स्थित यह मंदिर वास्तव में "सहस्त्रबाहु विष्णु" मंदिर है, जो अपभ्रंश होकर "सास-बहू" कहलाने लगा। 10वीं सदी में गुहिल शासक द्वारा निर्मित यह मंदिर नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। नागदा 1241 ई. तक गुहिल वंश की राजधानी रही थी।
Jagdish Temple वैष्णव
उदयपुर
उदयपुर के सिटी पैलेस के निकट स्थित जगदीश मंदिर का निर्माण महाराणा जगत सिंह प्रथम ने 1651 ई. में करवाया था। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर इंडो-आर्यन स्थापत्य शैली का भव्य उदाहरण है। उदयपुर का सबसे बड़ा और प्रमुख मंदिर माना जाता है।
Rishabhdev Temple (केसरियाजी) जैन + हिंदू
ऋषभदेव, उदयपुर
उदयपुर से ~64 किमी दूर कोयल नदी के किनारे स्थित यह मंदिर हिंदू, जैन और आदिवासी — तीनों समुदायों की आस्था का संगम है। भगवान ऋषभदेव की काले पत्थर की प्रतिमा पर केसर चढ़ाने की परंपरा के कारण इन्हें "केसरियाजी" कहते हैं। आदिवासी समाज इन्हें "कालिया बाबा" के नाम से पूजता है।
Eklingji Temple शैव
एकलिंगजी, उदयपुर
8वीं सदी में बप्पा रावल द्वारा निर्मित एकलिंगजी मंदिर मेवाड़ के शासकों के कुल देवता का मंदिर है। पाशुपत संप्रदाय से जुड़े इस मंदिर को मेवाड़ का वास्तविक शासक माना जाता था और राणा स्वयं को उनका दीवान कहते थे। यह राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण शैव तीर्थों में से एक है।
Ambika Mata Temple शक्ति
जगत, उदयपुर
उदयपुर जिले के जगत ग्राम में स्थित अम्बिका माता मंदिर 10वीं सदी की उत्कृष्ट मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है। इसे "राजस्थान का खजुराहो" भी कहा जाता है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर अंकित मूर्तियाँ मध्यकालीन शिल्पकला का अनुपम उदाहरण हैं।
Adbhut Ji Temple वैष्णव
नागदा, उदयपुर
उदयपुर जिले के नागदा में स्थित अद्भुतजी मंदिर भगवान विष्णु के अद्भुत स्वरूप को समर्पित है। सास-बहू मंदिर के समीप होने के कारण यह भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं में लोकप्रिय है। इस क्षेत्र के मंदिर समूह मेवाड़ की समृद्ध धरोहर के प्रतीक हैं।
अजमेर जिला (पुष्कर)
Brahma Temple, Pushkar ब्रह्मा
पुष्कर, अजमेर
पुष्कर में स्थित यह भारत का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर है। पुष्कर झील के तट पर स्थित यह मंदिर 14वीं सदी में बना माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं।
Savitri Temple शक्ति
पुष्कर, अजमेर
पुष्कर की रत्नागिरि पहाड़ी पर स्थित सावित्री मंदिर ब्रह्मा जी की पत्नी देवी सावित्री को समर्पित है। पहाड़ी पर होने के कारण यहाँ से पुष्कर झील और शहर का अत्यंत सुंदर दृश्य दिखता है। अब यहाँ रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।
Rangji Temple वैष्णव
पुष्कर, अजमेर
पुष्कर में स्थित रंगजी मंदिर दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली में बना है, जो राजस्थान में अपने आप में अनोखा है। भगवान रंगनाथ (विष्णु) को समर्पित यह मंदिर 1823 ई. में निर्मित हुआ। मंदिर का गोपुरम (प्रवेश द्वार) पुष्कर की विशिष्ट पहचान है।
Varaha Temple वैष्णव
पुष्कर, अजमेर
पुष्कर में स्थित वराह मंदिर भगवान विष्णु के वराह (सूअर) अवतार को समर्पित है। यह पुष्कर के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। पुष्कर को हिंदू धर्म का पाँचवाँ धाम माना जाता है और वराह मंदिर इसका अभिन्न अंग है।
Apteshwar Temple शैव
पुष्कर, अजमेर
पुष्कर में स्थित आप्तेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। पुष्कर के पवित्र तीर्थ परिसर में यह मंदिर शैव उपासकों का प्रमुख केंद्र है। यहाँ शिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
बीकानेर जिला
Karni Mata Temple (चूहों का मंदिर) लोक देवी
देशनोक, बीकानेर
बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता मंदिर "चूहों के मंदिर" के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध है। महाराजा गंगासिंह द्वारा निर्मित इस मंदिर में हजारों काले चूहे (काबा) पवित्र माने जाते हैं। बीकानेर के राठौड़ शासकों की कुल देवी करणी माता को माना जाता है।
Kapil Muni Temple तीर्थ
कोलायत, बीकानेर
बीकानेर जिले के कोलायत में स्थित यह मंदिर महर्षि कपिल मुनि को समर्पित है। कोलायत को "राजस्थान का सुंदर तीर्थ" कहा जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ विशाल मेला लगता है जिसमें पवित्र कोलायत झील में स्नान का विशेष महत्व है।
सिरोही जिला (माउंट आबू)
Dilwara Jain Temples जैन
माउंट आबू, सिरोही
माउंट आबू में स्थित दिलवाड़ा मंदिर संगमरमर की उत्कृष्ट नक्काशी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ पाँच प्रमुख जैन मंदिर हैं जिनमें विमलवसही (1031 ई.) और लूणवसही (1287 ई.) सबसे महत्वपूर्ण हैं। इन्हें भारतीय शिल्पकला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है।
Vimal Vasahi Temple जैन
माउंट आबू, सिरोही
दिलवाड़ा परिसर का यह मंदिर 1031 ई. में गुजरात के चालुक्य मंत्री विमलशाह ने बनवाया था। शिल्पकार कीर्तिधर के निर्देशन में ~1500 कारीगरों ने इसे निर्मित किया। मंदिर में 57 देवकुलिकाएँ हैं और छत की नक्काशी इतनी बारीक है कि पत्थर मलमल जैसा लगता है।
Luna Vasahi Temple जैन
माउंट आबू, सिरोही
1287 ई. में वास्तुपाल और तेजपाल द्वारा निर्मित यह मंदिर भगवान नेमिनाथ (22वें तीर्थंकर) को समर्पित है। इसकी संगमरमर की नक्काशी विमलवसही से भी अधिक बारीक मानी जाती है। गुजरात के सोलंकी काल की स्थापत्य कला का यह उत्कृष्ट नमूना है।
Varuneshwar Temple शैव
सिरोही
सिरोही में स्थित वरुणेश्वर मंदिर भगवान शिव के वरुण स्वरूप को समर्पित है। यह इस क्षेत्र का एक प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। स्थानीय श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र यह मंदिर अरावली की प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित है।
चित्तौड़गढ़ जिला
Mira Temple वैष्णव
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित मीरा मंदिर भक्त मीराबाई की आराधना स्थली है। इंडो-आर्यन शैली में बने इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित है। मीराबाई के भजन और भक्ति की प्रेरणास्त्रोत यह स्थान विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
Kalika Mata Temple शक्ति
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित कालिका माता मंदिर मूलतः 8वीं सदी में सूर्य मंदिर के रूप में बना था, जो बाद में शक्ति मंदिर में परिवर्तित हो गया। यह मेवाड़ के शासकों की आराध्य देवी का मंदिर है। नवरात्रि में यहाँ विशेष आयोजन होते हैं।
Kumbh Shyam Temple वैष्णव
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित कुम्भश्याम मंदिर का निर्माण महाराणा कुम्भा ने 15वीं सदी में करवाया था। इंडो-आर्यन शैली में बना यह मंदिर भगवान विष्णु (वराह अवतार) को समर्पित है। कुम्भा काल की स्थापत्य कला का यह एक श्रेष्ठ उदाहरण है।
Baroli Temples शैव
रावतभाटा क्षेत्र, चित्तौड़गढ़
कोटा के समीप रावतभाटा क्षेत्र में स्थित बाड़ोली मंदिर समूह 8 मंदिरों का एक ऐतिहासिक परिसर है। 9वीं-10वीं सदी में परमार शासकों द्वारा निर्मित इन मंदिरों में घटेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख है। नागर व पंचायतन शैली की इस स्थापत्य कला को ASI संरक्षित धरोहर घोषित किया गया है।
प्रतापगढ़ जिला
Amba Mata Temple शक्ति
प्रतापगढ़
प्रतापगढ़ में स्थित अम्बा माता मंदिर माँ दुर्गा के अम्बा स्वरूप को समर्पित है। यह जिले का प्रमुख शक्तिपीठ है जहाँ नवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं। स्थानीय लोगों की अगाध आस्था का यह केंद्र इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है।
Gautameshwar Temple शैव
अरनोद, प्रतापगढ़
प्रतापगढ़ जिले के अरनोद क्षेत्र में स्थित गौतमेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह आदिवासी बहुल क्षेत्र का प्रमुख तीर्थ है जहाँ हिंदू और आदिवासी दोनों समुदायों की श्रद्धा जुड़ी है। यहाँ लगने वाले मेले में बड़ी संख्या में भील और गरासिया समुदाय के लोग आते हैं।
राजसमंद जिला
Charbhuja Temple वैष्णव
राजसमंद
राजसमंद जिले में स्थित चतुर्भुज (चारभुजा) मंदिर भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप को समर्पित है। यह मेवाड़ के सबसे महत्वपूर्ण वैष्णव तीर्थों में से एक है। यहाँ की प्रतिमा को स्वयंभू (स्वयं प्रकट) माना जाता है।
Dwarkadhish Temple, Kankroli वैष्णव
कांकरोली, राजसमंद
राजसमंद झील के तट पर स्थित द्वारकाधीश मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह वैष्णव संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) का प्रमुख केंद्र है। श्रीनाथजी नाथद्वारा से लाई गई मूर्ति से जुड़ी इस मंदिर की धार्मिक परंपरा मेवाड़ के राजवंश से सीधे जुड़ी है।
नागौर जिला
Mirabai Temple, Merta वैष्णव
मेड़ता सिटी, नागौर
नागौर जिले के मेड़ता नगर में स्थित मीराबाई मंदिर उस महान भक्त कवयित्री की जन्मस्थली का स्मारक है। मीराबाई यहीं पली-बढ़ीं और उनकी प्रारंभिक भक्ति साधना यहीं हुई। श्रीकृष्ण भक्तों के लिए यह स्थान अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है।
Dadhimati Mata Temple शक्ति
जायल, नागौर
नागौर जिले के जायल में स्थित दधिमती माता मंदिर राजस्थान के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। यह दाधीच ब्राह्मण समाज की कुल देवी का मंदिर है। गुप्तकालीन मूर्तिकला की दृष्टि से यह मंदिर पुरातत्व के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जोधपुर जिला
Sachiya Mata Temple शक्ति
ओसियां, जोधपुर
जोधपुर से ~58 किमी दूर ओसियां में स्थित सच्चियाय माता मंदिर ओसवाल जैन और हिंदू दोनों समुदायों की देवी का प्रमुख मंदिर है। यह राजस्थान की प्राचीन धार्मिक नगरी ओसियां का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। प्रतिहारकालीन स्थापत्य शैली में बना यह मंदिर पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
Mahamandir Temple शैव
जोधपुर
जोधपुर में स्थित महामंदिर 84 स्तम्भों पर खड़ा एक भव्य शिव मंदिर है। इसका निर्माण महाराजा मान सिंह ने 19वीं सदी में करवाया था। प्रत्येक स्तम्भ पर योग मुद्राओं में मानव आकृतियाँ उत्कीर्ण हैं जो इसे अद्वितीय बनाती हैं।
झालावाड़ जिला
Sun Temple, Jhalrapatan सूर्य मंदिर
झालरापाटन, झालावाड़
झालरापाटन का शीतलेश्वर महादेव / सूर्य मंदिर राजस्थान का प्रथम तिथि अंकित मंदिर है जिसके शिलालेख पर 689 ईस्वी की तिथि अंकित है। नागर शैली में निर्मित यह मंदिर सूर्य उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। इसे "सात सहेलियों का मंदिर" भी कहते हैं।
अन्य जिले
Laxman Temple वैष्णव
भरतपुर
भरतपुर में स्थित लक्ष्मण मंदिर भगवान राम के अनुज लक्ष्मण को समर्पित है। यह ब्रज क्षेत्र के निकट होने के कारण वैष्णव भक्ति परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। भरतपुर के जाट शासकों की आस्था का यह प्रमुख केंद्र था।
Machkund Temple तीर्थ
धौलपुर
धौलपुर में स्थित मचकुंड तीर्थ एक प्राचीन जलकुंड और मंदिर परिसर है जो सूर्यवंशी राजा मचकुंड से जुड़ी पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ अनेक मंदिर एवं पवित्र कुंड हैं। यह धौलपुर का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल है।
Harshnath Temple शैव
सीकर
सीकर जिले में अरावली की पहाड़ियों पर स्थित हर्षनाथ मंदिर 10वीं सदी में परमार शासकों द्वारा बनवाया गया था। भगवान शिव के हर्षनाथ स्वरूप को समर्पित यह मंदिर अब खंडहर अवस्था में है किंतु यहाँ की मूर्तियाँ सीकर संग्रहालय में संरक्षित हैं।
Jeen Mata Temple शक्ति
सीकर
सीकर जिले में स्थित जीण माता मंदिर राजस्थान की प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना माना जाता है। नवरात्रि में यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं और रात्रि में भव्य जागरण का आयोजन होता है।
Shakambhari Mata Temple शक्ति
सांभर, सीकर
सीकर जिले के सांभर क्षेत्र में स्थित शाकम्भरी माता मंदिर चाहमान (चौहान) वंश की कुल देवी का प्रमुख पीठ है। देवी शाकम्भरी को अन्न और वनस्पति की देवी माना जाता है। यह राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है।
Neelkanth Temple शैव
अलवर
अलवर जिले में स्थित नीलकंठ मंदिर भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप को समर्पित है। यह मंदिर 6वीं-9वीं सदी में प्रतिहार काल में निर्मित माना जाता है और इसकी मूर्तिकला अत्यंत उत्कृष्ट है। सरिस्का क्षेत्र के समीप होने के कारण यह पर्यटकों में भी लोकप्रिय है।
Kansua Temple शैव
कोटा
कोटा में स्थित कंसुआ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है जिसका शिलालेख 738 ई. का है। इसमें चतुर्मुखी शिवलिंग स्थापित है जो इसे विशेष बनाता है। यह कोटा के सबसे पुराने ऐतिहासिक धरोहर स्थलों में से एक है।
Kaila Devi Temple शक्ति
करौली
करौली जिले में त्रिनेत्र नदी के किनारे स्थित कैलादेवी मंदिर राजस्थान का प्रमुख शक्तिपीठ है। यह करौली के यदुवंशी राजाओं की कुल देवी का मंदिर है। चैत्र नवरात्रि पर यहाँ लाखों श्रद्धालुओं का विशाल मेला लगता है।
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