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Number System Maths

N
By NotesMind

1. संख्या पद्धति क्या है?

Number System गणित की वह बुनियादी शाखा है जिसमें संख्याओं के प्रकार, उनके गुण (properties), और उन पर की जाने वाली संक्रियाओं (operations) का अध्ययन किया जाता है। यह लगभग सभी गणितीय अवधारणाओं (arithmetic, algebra) की नींव (foundation) है।

मूल सिद्धांत: हर संख्या किसी न किसी श्रेणी (category) में आती है — प्राकृत, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय, अपरिमेय, वास्तविक आदि। इन श्रेणियों और उनके गुणों को समझना ही इस टॉपिक की कुंजी है।

2. यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

  • SSC, Railway, Bank जैसी लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में Number System से 4-6 प्रश्न नियमित रूप से आते हैं।
  • यह टॉपिक Simplification, HCF-LCM, Percentage जैसे अन्य गणित टॉपिक्स की नींव है — इसे समझे बिना आगे बढ़ना मुश्किल है।
  • बुनियादी होने के बावजूद, इसमें कई उच्च-स्तरीय ट्रिक्स छिपी होती हैं जो गणना को बहुत तेज़ बना देती हैं।

3. संख्याओं के मुख्य प्रकार (वर्गीकरण)

(क) प्राकृत संख्याएँ (Natural Numbers) — N

गिनती में प्रयोग होने वाली संख्याएँ: 1, 2, 3, 4, 5...
(0 शामिल नहीं है)

(ख) पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers) — W

प्राकृत संख्याओं में 0 जोड़ने पर: 0, 1, 2, 3, 4...

(ग) पूर्णांक (Integers) — Z

धनात्मक, ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य: ..., −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3...

(घ) परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers) — Q

जिन्हें p/q के रूप में लिखा जा सके (जहाँ q≠0): जैसे 1/2, 3/4, 5 (=5/1), 0.75 (=3/4)

(ङ) अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers)

जिन्हें p/q रूप में नहीं लिखा जा सकता: जैसे √2, √3, π (पाई)

(च) वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) — R

परिमेय और अपरिमेय, दोनों प्रकार की संख्याओं का समूह

संख्याओं का पदानुक्रम (Hierarchy)

प्राकृत संख्याएँ ⊂ पूर्ण संख्याएँ ⊂ पूर्णांक ⊂ परिमेय संख्याएँ ⊂ वास्तविक संख्याएँ
                                                    ↑
                              अपरिमेय संख्याएँ भी वास्तविक संख्याओं का हिस्सा हैं

4. सम और विषम संख्याएँ (Even and Odd Numbers)

  • सम संख्या (Even): जो 2 से पूरी तरह विभाजित हो — 2, 4, 6, 8...
  • विषम संख्या (Odd): जो 2 से पूरी तरह विभाजित न हो — 1, 3, 5, 7...

महत्वपूर्ण नियम:

  • सम + सम = सम; विषम + विषम = सम; सम + विषम = विषम
  • सम × सम = सम; विषम × विषम = विषम; सम × विषम = सम

5. अभाज्य और भाज्य संख्याएँ (Prime and Composite Numbers)

  • अभाज्य संख्या (Prime): जिसके केवल दो गुणनखंड हों — 1 और स्वयं। जैसे 2, 3, 5, 7, 11...
  • भाज्य संख्या (Composite): जिसके दो से अधिक गुणनखंड हों। जैसे 4, 6, 8, 9...
  • 1 न अभाज्य है, न भाज्य — यह एक विशेष संख्या है।
  • 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है — बाकी सभी अभाज्य संख्याएँ विषम होती हैं।

100 तक की अभाज्य संख्याएँ (याद रखें):
2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47, 53, 59, 61, 67, 71, 73, 79, 83, 89, 97

6. सह-अभाज्य संख्याएँ (Co-prime Numbers)

दो संख्याएँ सह-अभाज्य कहलाती हैं यदि उनका HCF = 1 हो, भले ही वे स्वयं अभाज्य न हों।

उदाहरण: 8 और 15 सह-अभाज्य हैं (HCF=1), भले ही 8 भाज्य संख्या है।

7. विभाज्यता के नियम (Divisibility Rules) — अत्यंत महत्वपूर्ण

संख्या नियम
2 अंतिम अंक सम (0,2,4,6,8) हो
3 सभी अंकों का योग 3 से विभाज्य हो
4 अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य हो
5 अंतिम अंक 0 या 5 हो
6 संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो
8 अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य हो
9 सभी अंकों का योग 9 से विभाज्य हो
10 अंतिम अंक 0 हो
11 (विषम स्थान के अंकों का योग) − (सम स्थान के अंकों का योग) = 0 या 11 का गुणज

उदाहरण

प्रश्न: क्या 4356 संख्या 11 से विभाज्य है?

हल: दाईं से अंक: 6,5,3,4
विषम स्थान (1st,3rd): 6+3=9
सम स्थान (2nd,4th): 5+4=9
अंतर = 9−9=0 → हाँ, 11 से विभाज्य है

8. स्थानीय मान और अंकित मान (Place Value and Face Value)

उदाहरण: संख्या 4826 में अंक "8" का:

  • अंकित मान (Face Value): सिर्फ 8
  • स्थानीय मान (Place Value): 8 × 100 = 800 (क्योंकि यह सैकड़े के स्थान पर है)

9. भाग एल्गोरिथम (Division Algorithm)

भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल
Dividend = (Divisor × Quotient) + Remainder

उदाहरण: यदि 47 को 6 से भाग दिया जाए:
47 = 6×7 + 5 (भागफल=7, शेषफल=5)

10. हल करने की 7 आसान ट्रिक्स

  1. विभाज्यता के नियम ज़ुबानी याद रखें — ये गणना को बहुत तेज़ कर देते हैं, खासकर बड़ी संख्याओं के लिए।
  2. 100 तक की अभाज्य संख्याओं की सूची रटें — यह HCF-LCM, Factorization जैसे टॉपिक्स में भी काम आती है।
  3. सम-विषम के नियम (जोड़/गुणा में) याद रखें — इससे बिना पूरी गणना किए उत्तर की प्रकृति (सम/विषम) पता चल जाती है।
  4. सह-अभाज्य और अभाज्य में अंतर स्पष्ट रखें — ये अक्सर भ्रमित करने वाले प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
  5. बड़ी संख्याओं में 11 से विभाज्यता जाँचने के लिए विषम-सम स्थान वाला नियम प्रयोग करें, सीधे भाग न दें।
  6. संख्याओं के पदानुक्रम (hierarchy) को चित्र के रूप में याद रखें — किस संख्या-समूह में कौन सी श्रेणी आती है।
  7. भाग एल्गोरिथम को हमेशा याद रखें — यह शेषफल आधारित प्रश्नों में बहुत उपयोगी है।

11. सामान्य गलतियाँ जिनसे बचें

  • 1 को अभाज्य संख्या मान लेना — 1 न अभाज्य है, न भाज्य।
  • 0 को प्राकृत संख्या में शामिल कर लेना — 0, पूर्ण संख्याओं में आता है, प्राकृत संख्याओं में नहीं।
  • सह-अभाज्य और अभाज्य को एक जैसा समझ लेना — सह-अभाज्य के लिए दोनों संख्याओं का खुद अभाज्य होना ज़रूरी नहीं।
  • विभाज्यता नियमों को गलत तरीके से लागू करना, खासकर 11 के नियम में स्थान की गिनती में गलती।

12. अभ्यास प्रश्न (खुद हल करें)

Q1. क्या 2346 संख्या 3 से विभाज्य है?
Q2. क्या 7128 संख्या 8 से विभाज्य है?
Q3. क्या 15 और 28 सह-अभाज्य हैं?
Q4. यदि 83 को 9 से भाग दिया जाए, तो भागफल और शेषफल क्या होंगे?

13. उत्तर और स्पष्टीकरण

Q1. हाँ — अंकों का योग: 2+3+4+6=15, जो 3 से विभाज्य है

Q2. हाँ — अंतिम तीन अंक "128", जो 8 से विभाज्य है (128÷8=16)

Q3. हाँ — 15=3×5, 28=2²×7; कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं, HCF=1, इसलिए सह-अभाज्य हैं

Q4. भागफल=9, शेषफल=2 — 83 = 9×9+2 = 81+2=83 ✓

14. मुख्य बिंदु (Quick Revision)

  • Number System = संख्याओं के प्रकार (प्राकृत, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय, अपरिमेय) और उनके गुणों का अध्ययन।
  • विभाज्यता के नियम (2,3,4,5,6,8,9,10,11) गणना को बहुत तेज़ बनाते हैं।
  • 1 न अभाज्य है न भाज्य; 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
  • सह-अभाज्य का मतलब HCF=1, न कि दोनों संख्याओं का अभाज्य होना ज़रूरी।

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