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राजस्थान की जलवायु

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By NotesMind
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राजस्थान भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है और इसकी जलवायु देश के अन्य राज्यों की तुलना में अत्यंत विशिष्ट एवं विविधतापूर्ण है। यहाँ एक ओर पश्चिम में विस्तृत थार मरुस्थल है तो दूसरी ओर दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी भाग अपेक्षाकृत अधिक आर्द्र और वनाच्छादित हैं। इस विविधता का मुख्य कारण भौगोलिक स्थिति, स्थलाकृति, मानसूनी प्रणाली और अन्य प्राकृतिक कारक हैं।


1. भौगोलिक स्थिति और विस्तार

राजस्थान 23°3' उत्तरी अक्षांश से 30°12' उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित है। यह स्थिति इसे उपोष्ण कटिबंध (Subtropical Region) में रखती है। यह वही अक्षांशीय क्षेत्र है जिसमें विश्व के कई शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र आते हैं।

इसी अक्षांशीय पट्टी में सऊदी अरब, मिस्र, उत्तरी सहारा मरुस्थल (अफ्रीका) और मैक्सिको के कुछ भाग स्थित हैं। इन सभी क्षेत्रों की जलवायु में एक समानता देखी जाती है—कम वर्षा, अधिक तापमान और उच्च वाष्पीकरण।

भारत के संदर्भ में देखें तो उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुछ हिस्से भी इसी अक्षांशीय विस्तार में आते हैं, लेकिन वहाँ अधिक वर्षा होती है। इसका कारण है—समुद्र की निकटता और मानसून की प्रभावशीलता।


2. जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

(i) समुद्र से दूरी (Distance from Sea)

राजस्थान समुद्र से काफी दूर स्थित है। राज्य का दक्षिणी भाग कच्छ की खाड़ी से लगभग 225 किमी और अरब सागर से लगभग 400 किमी दूर है। समुद्र से दूरी का सीधा प्रभाव जलवायु पर पड़ता है।

समुद्र के पास स्थित क्षेत्रों में तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता, जबकि दूरस्थ क्षेत्रों में तापमान अत्यधिक होता है। इसी कारण राजस्थान में महाद्वीपीय जलवायु पाई जाती है, जिसमें:

  • गर्मियों में अत्यधिक गर्मी
  • सर्दियों में अत्यधिक ठंड
  • वर्षा की कमी

देखने को मिलती है।


(ii) अरावली पर्वतमाला की भूमिका

अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक तत्व है। यह पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली हुई है।

मानसून की हवाएँ मुख्यतः दक्षिण-पश्चिम से आती हैं। यदि पर्वत श्रेणियाँ इन हवाओं के लंबवत (perpendicular) होतीं, तो वर्षा अधिक होती। लेकिन अरावली पर्वतमाला इन हवाओं के समानांतर स्थित है, जिसके कारण:

  • हवाएँ बिना बाधा के आगे निकल जाती हैं
  • वर्षा नहीं हो पाती
  • पश्चिमी राजस्थान शुष्क बना रहता है

(iii) ऊँचाई (Altitude)

राजस्थान का अधिकांश भाग समुद्र तल से लगभग 370 मीटर से कम ऊँचाई पर स्थित है। निम्न ऊँचाई के कारण:

  • तापमान अधिक रहता है
  • वाष्पीकरण अधिक होता है
  • आर्द्रता कम रहती है

हालांकि माउंट आबू जैसे उच्च स्थानों पर तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।


3. महत्वपूर्ण जलवायु तथ्य

(i) कर्क रेखा का प्रभाव

कर्क रेखा राजस्थान के दक्षिणी जिलों डूंगरपुर और बांसवाड़ा से होकर गुजरती है। इसके कारण:

  • यहाँ सूर्य की किरणें अधिक सीधी पड़ती हैं
  • तापमान अधिक रहता है
  • उष्ण जलवायु पाई जाती है

(ii) औसत वर्षा

राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 57.51 सेमी है, जो भारत के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। यह वर्षा भी पूरे राज्य में समान रूप से वितरित नहीं है।


(iii) मावट (Mahawat)

शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभों के कारण होने वाली हल्की वर्षा को ‘मावट’ कहा जाता है। यह वर्षा विशेष रूप से रबी फसलों (गेहूं, सरसों) के लिए लाभकारी होती है।


(iv) तापमान की विशेषताएँ

  • पश्चिमी राजस्थान देश का सबसे गर्म क्षेत्र माना जाता है
  • जैसलमेर में दैनिक तापान्तर सबसे अधिक होता है
  • माउंट आबू और भोरठ पठार गर्मियों में भी ठंडे रहते हैं

4. ऋतुओं का वर्गीकरण

राजस्थान में तीन मुख्य ऋतुएँ पाई जाती हैं:

(i) ग्रीष्म ऋतु (Summer Season)

  • समय: मार्च से मध्य जून
  • तापमान: 35°C से 40°C (अधिकतम 48°C तक)

इस समय सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिससे तापमान बहुत अधिक हो जाता है।


(ii) वर्षा ऋतु (Monsoon Season)

  • समय: मध्य जून से सितंबर
  • तापमान: 28°C से 30°C

इस दौरान मानसून की हवाएँ वर्षा लाती हैं।


(iii) शीत ऋतु (Winter Season)

  • समय: दिसंबर से फरवरी
  • तापमान: 12°C से 17°C

इस समय तापमान कम होता है और कभी-कभी पाला भी पड़ता है।


5. ग्रीष्म ऋतु का विस्तृत अध्ययन

ग्रीष्म ऋतु राजस्थान की सबसे कठोर ऋतु मानी जाती है।

तापमान

उत्तर-पश्चिमी जिलों जैसे चूरू, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर में तापमान 48°C तक पहुँच जाता है।

विशेषताएँ

  • शुष्क वातावरण

  • साफ आकाश
  • दिन में अत्यधिक गर्मी
  • रात में तापमान गिर जाता है

सबसे गर्म जिला

चूरू को राजस्थान का सबसे गर्म जिला माना जाता है।


6. लू और आँधियाँ

लू (Hot Winds)

गर्मियों में बलूचिस्तान के पठार से आने वाली गर्म और शुष्क हवाओं को ‘लू’ कहा जाता है। ये हवाएँ स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होती हैं।


आँधियाँ (Dust Storms)

राजस्थान में धूल भरी आँधियाँ सामान्य घटना हैं।

आँधियों का वितरण:

  • श्रीगंगानगर: 27 दिन (सर्वाधिक)
  • हनुमानगढ़: 24 दिन
  • बीकानेर: 15 दिन
  • जोधपुर/जैसलमेर: 12 दिन
  • कोटा: 5 दिन
  • झालावाड़: 3 दिन (न्यूनतम)

➡ आँधियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर कम होती जाती हैं।


7. वर्षा का वितरण

सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र

  • माउंट आबू: 150 सेमी
  • झालावाड़: 100 सेमी
  • बांसवाड़ा: 90 सेमी

न्यूनतम वर्षा वाले क्षेत्र

  • जैसलमेर: 15 सेमी
  • बाड़मेर, बीकानेर: लगभग 25 सेमी

विशेषता

राजस्थान में वर्षा अत्यंत अनियमित और परिवर्तनशील है।


8. मानसून प्रणाली

प्रवेश

मानसून राजस्थान में बांसवाड़ा से प्रवेश करता है (16–20 जून)।

निम्न वायुदाब

सिंध और पश्चिमी राजस्थान में गर्मी के कारण निम्न वायुदाब बनता है।


मानसून की शाखाएँ

(i) अरब सागरीय शाखा

  • अरावली के समानांतर चलती है
  • वर्षा नहीं करती

(ii) बंगाल की खाड़ी शाखा

  • गंगा के मैदान से होकर आती है
  • नमी कम हो जाती है
  • केवल पूर्वी राजस्थान में वर्षा करती है

9. कम वर्षा के कारण

  1. मानसून का अंतिम क्षेत्र होना

  2. नमी की कमी
  3. उच्च तापमान
  4. अरावली की दिशा

10. जलवायु प्रदेश

राजस्थान को वर्षा के आधार पर विभिन्न भागों में बाँटा गया है:

  • अर्द्धशुष्क प्रदेश
  • उप-आर्द्र प्रदेश
  • आर्द्र प्रदेश
  • अति आर्द्र प्रदेश

11. जलवायु वर्गीकरण

(i) कोपेन वर्गीकरण

  • Aw
  • Bshw
  • Bwhw
  • Cwg

(ii) थॉर्नथवेट वर्गीकरण

  • CA'w
  • DA'w (सबसे बड़ा क्षेत्र)
  • EA'd

(iii) ट्रिवार्था वर्गीकरण

  • Aw
  • Bsh
  • Bwh
  • Caw

12. जिलावार आँकड़े

चूरू:

  • अधिकतम तापमान: 49°C
  • न्यूनतम: -1.1°C

झालावाड़:

  • वर्षा: 100 सेमी

जैसलमेर:

  • वर्षा: 15 सेमी

13. जल संसाधन

राजस्थान में भारत के कुल जल संसाधनों का केवल 1% उपलब्ध है।

समस्याएँ

  • भूजल स्तर गिरना
  • अनियमित वर्षा
  • अधिक वाष्पीकरण

14. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • सबसे गर्म महीना: जून

  • सबसे ठंडा महीना: जनवरी
  • वार्षिक तापान्तर: 22°C

15. स्थानीय शब्दावली

  • मावट = शीतकालीन वर्षा

  • भभूल्या = छोटे बवंडर
  • पुरवइयाँ = बंगाल की हवाएँ

16. विशेष तथ्य

  • माउंट आबू = राजस्थान का बरखौयांस्क

  • चूरू और धौलपुर = सबसे गर्म जिले

17. वर्षा वितरण (विस्तार से)

राजस्थान में वर्षा पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है।
पश्चिमी भाग में 10 सेमी से भी कम वर्षा होती है जबकि दक्षिण-पूर्वी भाग में 100 सेमी तक।


18. भौगोलिक परिकल्पना

यदि अरावली पर्वतमाला की दिशा बदल जाती:

  • थार मरुस्थल समाप्त हो जाता
  • उत्तर भारत रेगिस्तान बन जाता
  • दक्षिण राजस्थान में अत्यधिक वर्षा होती

निष्कर्ष

राजस्थान की जलवायु अत्यंत विविध और जटिल है। यह भौगोलिक स्थिति, अरावली पर्वतमाला, मानसून प्रणाली और समुद्र से दूरी जैसे कारकों से प्रभावित होती है। यहाँ का पश्चिमी भाग शुष्क मरुस्थलीय है, जबकि दक्षिण-पूर्वी भाग अपेक्षाकृत आर्द्र है।

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