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राजस्थान के प्रमुख संगीत घराने, लोक गीत एवं लोक कथाएँ | सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री Part-1

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By NotesMind
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राजस्थान के प्रमुख संगीत घराने: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

छात्रों की सुविधा के लिए इस जानकारी को व्यवस्थित श्रेणियों में बाँटा गया है:

1. जयपुर के प्रमुख घराने

जयपुर संगीत और कला का एक बड़ा केंद्र रहा है, यहाँ से कई महत्वपूर्ण शाखाएं निकली हैं:

  • जयपुर का सैनिया घराना: इसके संस्थापक सूरतसेन (तानसेन के पुत्र) थे。 यह घराना विशेष रूप से सितार वादन के लिए जाना जाता है, जिसके प्रसिद्ध कलाकार अमृतसेन हुए हैं。
  • जयपुर घराना (ख्याल शैली): इसके संस्थापक मनरंग (भूपत खाँ) थे。 यह अपनी विशिष्ट 'ख्याल गायन' शैली के लिए प्रसिद्ध है。
  • जयपुर का बीनकार घराना: रजब अली खाँ द्वारा स्थापित यह घराना महाराजा रामसिंह के दरबार से जुड़ा था。 यहाँ वीणा वादन की शिक्षा पर जोर दिया जाता है。
  • जयपुर का कत्थक घराना: राजस्थान को उत्तर भारत के शास्त्रीय नृत्य कत्थक का उद्गम स्थल माना जाता है。 बिरजू महाराज इस शैली के विश्व प्रसिद्ध कलाकार हैं。

2. जयपुर घराने की उप-शाखाएं (Sub-branches)

कुछ घराने जयपुर शैली से ही विकसित हुए हैं:

  • पटियाला घराना: इसकी स्थापना फतेह अली एवं अली बख्श ने की थी。 प्रसिद्ध गज़ल गायक गुलाम अली इसी घराने से ताल्लुक रखते हैं。
  • अतरौली घराना: इसके प्रमुख संगीतज्ञ मानतोल खाँ थे, जिन्हें 'रुलाने वाले फकीर' के नाम से भी जाना जाता है。
  • मेवाती घराना: उस्ताद घग्घे नजीर खाँ ने जयपुर की ख्याल गायकी को अपनी शैली में ढालकर इसकी शुरुआत की。 प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित जसराज इसी घराने से संबंधित हैं。

3. अन्य महत्वपूर्ण घराने और उनकी विशेषताएँ

घराना

संस्थापक / मुख्य व्यक्ति

विशेष टिप्पणी

डागर घराना

बहराम खाँ डागर

यह ध्रुपद गायकी की 'डागर वाणी' के लिए प्रसिद्ध है। इनका पुश्तैनी मकान जयपुर में 'बहराम खाँ की चौखट' के नाम से जाना जाता है।

किराना घराना

बन्दे अली खाँ

इसमें पंडित भीमसेन जोशी और गंगूबाई हंगल जैसे दिग्गज कलाकार हुए हैं।

रंगीला घराना

रमजान खाँ 'रंगीले'

इसमें होरी, ध्रुपद और ख्याल की बंदिशें प्रमुखता से रची गई हैं।

आगरा घराना

हाजी सुजान खाँ

इस घराने के कलाकारों ने जल तरंग और ठुमरी गायन में भी महारत हासिल की थी।

मथुरा घराना

महताब खाँ

यह ब्रज क्षेत्र का प्रमुख घराना है जो 'हवेली संगीत' के लिए प्रसिद्ध है।

ग्वालियर घराना

अब्दुल्ला खाँ एवं कादिर बख्श खाँ

इसे प्रसिद्ध करने का मुख्य श्रेय हद्दु खाँ और हस्सू खाँ को जाता है।

 




 

राजस्थान की शास्त्रीय संगीत परंपरा और लोक गीत

1. ध्रुपद गायकी की प्रमुख वाणियाँ (शैलियाँ)

मध्यकाल में ध्रुपद की चार मुख्य वाणियाँ प्रचलित थीं:

  • गौहरहारी वाणी: इसकी उत्पत्ति ग्वालियर से हुई और इसके प्रवर्तक तानसेन माने जाते हैं।
  • खंडारवाणी: इसके प्रवर्तक उनियारा (राजस्थान) के निकट खंडार के शासक सम्मोनखन सिंह थे।
  • डागुरवाणी: इसके प्रवर्तक ब्रजनंद डागर थे, लेकिन इसे ऊँचाइयों तक बहराम खाँ डागर ने पहुँचाया।
  • नौहारवाणी: इसके प्रवर्तक श्रीचंद नौहार थे।

2. हवेली संगीत

  • परिभाषा: मध्यकाल में जब मंदिरों में शास्त्रीय संगीत की ध्रुपद, कीर्तन और गायन शैलियों का विकास हुआ, तो इसे 'हवेली संगीत' कहा गया।
  • प्रमुख केंद्र: नाथद्वारा, कांकरोली, जयपुर, कोटा और भरतपुर के मंदिरों में आज भी यह परंपरा जीवित है।

3. संगीत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • विलियम जेम्स: बीकानेर के बैंड मास्टर जिन्होंने 'Indian Music' नामक पुस्तक लिखी।
  • राव अलीबख्श: इन्हें 'अलवर का रसखान' कहा जाता है।
  • सदारंग (नियामत खाँ): इन्हें 'ख्याल गायन शैली' को नया और प्रसिद्ध रूप देने का श्रेय जाता है।
  • पुण्डरीक विट्ठल: ये जयपुर महाराजा माधोसिंह और मानसिंह के आश्रित कवि थे।
  • उस्ताद चाँद खाँ: ये सवाई प्रतापसिंह के संगीत गुरु थे।

4. राजस्थान के प्रमुख लोक गीत (परीक्षा के लिए विशेष)

लोक गीत

मुख्य विशेषता / अवसर

घूमर

गणगौर और विशेष पर्वों पर गाया जाने वाला गीत। बोल: "मारी घूमर छै नखराली ए मा"

केसरिया बालम

यह एक 'रजवाड़ी गीत' है, जिसमें नारी अपने पति की प्रतीक्षा करती है।

पणिहारी

पतिव्रत धर्म पर अटल रहने वाली राजस्थानी स्त्री का प्रसिद्ध लोक गीत।

कूरजां

विरहणी नारी द्वारा अपने प्रियतम को संदेश भेजने के लिए गाया जाता है।

जीरो

इस गीत में पत्नी अपने पति से 'जीरा' न बोने की विनती करती है।

चिरमी

नववधू द्वारा अपने भाई और पिता की प्रतीक्षा के समय गाया जाने वाला गीत।

घूड़ला

मारवाड़ क्षेत्र में होली के बाद घूड़ला त्योहार पर कन्याओं द्वारा गाया जाता है।

कांगसियो

'कांगसियो' का अर्थ कंघा है, जिस पर आधारित यह एक प्रसिद्ध लोक गीत है।

बीछूडो

हाड़ौती क्षेत्र का गीत, जिसमें बिच्छू के काटने से मरने वाली पत्नी पति को दूसरे विवाह का संदेश देती है।

हिचकी

अलवर-मेवात क्षेत्र का प्रसिद्ध गीत। मान्यता है कि किसी की याद आने पर हिचकी आती है।

पंछीड़ा

हाड़ौती और ढूंढाड़ क्षेत्र के मेलों में अलगोजे, ढोलक और मंजीरे के साथ गाया जाता है।

लांगुरिया

करौली क्षेत्र में 'कैला देवी' की आराधना में गाया जाने वाला भक्ति गीत।

 


5. राजस्थान की लोक कथाएँ

राजस्थानी लोक कथाओं को कई वर्गों में बाँटा गया है, जैसे:

  • ऐतिहासिक: वीर और ऐतिहासिक चरित्रों की कथाएँ।
  • धार्मिक: देवी-देवताओं, धर्म और पौराणिक कथाएँ।
  • सामाजिक: प्रेम प्रधान, भाग्य, और मानवीय गुणों से संबंधित कथाएँ।
  • मनोरंजक: चोर, ठग, जादू और बुद्धि कौशल की कथाएँ।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. Rajasthan का सबसे प्रसिद्ध संगीत घराना कौन सा है?

राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध संगीत घराना Jaipur घराना माना जाता है। यह विशेष रूप से ख्याल गायन, वाद्य संगीत और शास्त्रीय नृत्य परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।


2. जयपुर के सैनिया घराने की स्थापना किसने की थी?

जयपुर के सैनिया घराने की स्थापना Suratsen ने की थी, जिन्हें Tansen का पुत्र माना जाता है।


3. जयपुर घराना किस गायन शैली के लिए प्रसिद्ध है?

जयपुर घराना मुख्य रूप से Khayal Gayaki के लिए प्रसिद्ध है। इसकी गायकी में रागों की गहराई और जटिलता विशेष होती है।


4. Mewati Gharana के सबसे प्रसिद्ध कलाकार कौन थे?

मेवाती घराने के सबसे प्रसिद्ध कलाकार Pandit Jasraj थे, जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।


5. Dagar Gharana किस संगीत शैली के लिए जाना जाता है?

डागर घराना ध्रुपद गायकी की डागर वाणी के लिए प्रसिद्ध है। यह भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे प्राचीन परंपराओं में से एक है।


6. हवेली संगीत क्या है?

जब मंदिरों में ध्रुपद, भजन और कीर्तन शैली में शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत किया जाता था, उसे हवेली संगीत कहा जाता है। यह परंपरा आज भी Shrinathji Temple जैसे मंदिरों में देखी जा सकती है।


7. राजस्थान में ध्रुपद गायकी की कितनी प्रमुख वाणियाँ हैं?

राजस्थान और उत्तर भारत की ध्रुपद परंपरा में चार प्रमुख वाणियाँ मानी जाती हैं— गौहरहारी, खंडार, डागुर और नौहार वाणी।


8. Rajasthan का सबसे लोकप्रिय लोक गीत कौन सा है?

राजस्थान के सबसे लोकप्रिय लोक गीतों में Kesariya Balam, घूमर और पणिहारी प्रमुख हैं।


9. घूमर गीत किस अवसर पर गाया जाता है?

Ghoomar गीत मुख्य रूप से विवाह, गणगौर और अन्य पारंपरिक उत्सवों के अवसर पर गाया जाता है।


10. लांगुरिया गीत किस देवी से संबंधित है?

लांगुरिया गीत Kaila Devi Temple में माता कैला देवी की आराधना से जुड़ा हुआ भक्ति गीत है।


11. राजस्थान की लोक कथाओं को कितने भागों में बाँटा गया है?

राजस्थान की लोक कथाओं को मुख्य रूप से ऐतिहासिक, धार्मिक, सामाजिक और मनोरंजक श्रेणियों में बाँटा जाता है।

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