राजस्थान की अपवाह प्रणाली
राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद जल संसाधनों की दृष्टि से काफी सीमित है। यहाँ देश के कुल जल संसाधनों का केवल लगभग 1% ही उपलब्ध है, जबकि क्षेत्रफल बहुत अधिक है। यही कारण है कि यहाँ जल प्रबंधन और नदियों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
जल संसाधनों की स्थिति
- राजस्थान में भारत के कुल जल संसाधनों का मात्र 1% भाग उपलब्ध है
- अधिकांश नदियाँ मौसमी (Seasonal) हैं
- केवल चम्बल नदी ही एकमात्र सदावाहिनी (Perennial) नदी है
जल विभाजक रेखा (Watershed)
राजस्थान में जल विभाजक रेखा (Watershed) अरावली पर्वतमाला के साथ फैली हुई है, जो दो प्रमुख अपवाह तंत्रों को अलग करती है:
- अरब सागर अपवाह तंत्र
- बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र
विस्तार
यह रेखा निम्न स्थानों से होकर गुजरती है:
- अलवर
- सांभर झील
- अजमेर
- ब्यावर
- देवगढ़
- कुंभलगढ़
- उदयसागर
- उदयपुर
- बड़ी सादड़ी
- प्रतापगढ़
इसके बाद यह मध्यप्रदेश में प्रवेश करती है
राजस्थान का अपवाह तंत्र (Drainage System)
अपवाह क्षेत्र के आधार पर राजस्थान की नदियों को 3 भागों में बाँटा गया है:
- आंतरिक अपवाह प्रणाली – 60.2%
- अरब सागर अपवाह प्रणाली – 17.1%
- बंगाल की खाड़ी अपवाह प्रणाली – 22.4%
राज्य में कुल 13 जलग्रहण क्षेत्र (Watersheds) और 59 उप-क्षेत्र हैं
(A) आंतरिक अपवाह प्रणाली
- कुल क्षेत्रफल का 60.2% भाग
- नदियाँ या तो:
- लवणीय झीलों में गिरती हैं
- या मरुस्थल में विलीन हो जाती हैं
घग्घर नदी
- उद्गम: शिवालिक पहाड़ियाँ (कालका, हिमाचल)
- मार्ग: पंजाब → हरियाणा → राजस्थान
- राजस्थान में प्रवेश: टिब्बी (हनुमानगढ़)
विशेष तथ्य
- सामान्यतः भटनेर के पास विलुप्त
- अधिक वर्षा में सूरतगढ़ तक पहुँचती है
- बाढ़ में पाकिस्तान के फोर्ट अब्बास तक जल जाता था
इसका पाट क्षेत्र "नाली" कहलाता है
अन्य नाम:
- सरस्वती
- दृषद्वती
- मृत नदी
माना जाता है कि यह सरस्वती नदी के मार्ग में बहती है
कान्तली नदी
- उद्गम: खंडेला (सीकर)
- समाप्ति: मंडरेला (झुंझुनूं)
- लंबाई: ~100 किमी
इसका बेसिन: तोरावाटी बेसिन
साबी नदी
- उद्गम: सेवर पहाड़ियाँ (जयपुर)
- हरियाणा में विलीन (पटौदी के पास)
काकनी नदी
- उद्गम: कोटड़ी (जैसलमेर)
- मीठा खाड़ी में विलीन
मन्था नदी
- उद्गम: मनोहरपुर (जयपुर)
- सांभर झील में गिरती है
रूपनगढ़ नदी
- उद्गम: सलेमाबाद (अजमेर)
- सांभर झील में गिरती है
रूपारेल नदी
- उद्गम: थानागाजी (अलवर)
- भरतपुर में विलुप्त
(B) अरब सागर अपवाह तंत्र
लूनी नदी (सबसे महत्वपूर्ण)
- अन्य नाम: लवणवती, मरु आशा
- उद्गम: नाग पहाड़ (अजमेर-पुष्कर)
- लंबाई: 350 किमी (330 किमी राजस्थान में)
बहाव क्षेत्र
- अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर
अंत: कच्छ का रन
विशेष तथ्य
- बालोतरा तक पानी मीठा
- उसके बाद खारा हो जाता है
- सांचोर में दलदल → "नेहड़"
सहायक नदियाँ
बाईं ओर:
- जवाई
- सूकड़ी
- लीलड़ी
दाईं ओर:
- जोजरी
- मीठड़ी
- सरस्वती
जवाई नदी
- लूनी की सबसे लंबी सहायक
- उद्गम: गोरिया (पाली)
- संगम: गांधव (बाड़मेर)
जवाई बांध
- सुमेरपुर (पाली)
- "मारवाड़ का अमृत सरोवर"
(C) बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र
चम्बल नदी
- उद्गम: जनापाव पहाड़ी (मध्यप्रदेश)
- कुल लंबाई: 966 किमी
- राजस्थान में: 153 किमी
यह यमुना नदी में मिलती है
विशेषताएँ
- राजस्थान की:
- सबसे लंबी नदी
- सबसे बड़ा अपवाह क्षेत्र
- एकमात्र सदावाहिनी नदी
प्रमुख जिले
- चित्तौड़गढ़
- कोटा
- बूंदी
- सवाई माधोपुर
- करौली
- धौलपुर
प्रमुख बाँध
- गांधी सागर
- राणा प्रताप सागर
- जवाहर सागर
- कोटा बैराज
विशेष क्षेत्र
- बीहड़ भूमि (Badland Topography)
- डांग क्षेत्र
बनास नदी
- राजस्थान की सबसे लंबी पूर्णतः राज्य में बहने वाली नदी
- लंबाई: 480 किमी
उद्गम
- खमनौर (राजसमंद)
- संगम
- रामेश्वर (सवाई माधोपुर) → चम्बल
सहायक नदियाँ
- बेड़च
- कोठारी
- मेनाल
- खारी
- मोरेल
माही नदी
- "वागड़ की गंगा"
- उद्गम: मध्यप्रदेश
विशेष तथ्य
- कर्क रेखा को 2 बार काटती है
- खंभात की खाड़ी में गिरती है
प्रमुख बाँध
- माही बजाज सागर
त्रिवेणी संगम
- बेणेश्वर (माही + सोम + जाखम)
साबरमती नदी
- उद्गम: उदयपुर
- अंत: खंभात की खाड़ी
कालीसिंध, पार्वती, परवन
- चम्बल की सहायक नदियाँ
- मध्यप्रदेश से निकलती हैं
अन्य महत्वपूर्ण नदियाँ
- बाणगंगा → यमुना की सहायक
- गंभीर नदी → आगरा के पास यमुना में मिलती है
- पार्वती (धौलपुर) → यमुना
जिलेवार नदियाँ (Important Overview)
- श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ → घग्घर
- अजमेर → लूनी, बनास
- उदयपुर → बेड़च, सोम, जाखम
- कोटा → चम्बल, कालीसिंध
- बीकानेर, चूरू → कोई नदी नहीं
नदियों के किनारे बसे प्रमुख स्थान
- चम्बल → कोटा
- लूनी → बालोतरा, समदड़ी
- जवाई → सुमेरपुर
- माही → बेणेश्वर
- कालीसिंध → झालावाड़
ऐतिहासिक तथ्य
- घग्घर (हाकड़ा) के किनारे:
- कालीबंगा
- पीलीबंगा
- हड़प्पा सभ्यता
प्राचीन सरस्वती नदी इसी क्षेत्र में बहती थी
निष्कर्ष
राजस्थान में जल संसाधनों की कमी के बावजूद यहाँ की नदियाँ भौगोलिक, ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
अपवाह तंत्र, नदियों का वितरण और बाँधों की संरचना परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं।
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