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राजस्थान का भौगोलिक परिचय

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By NotesMind
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राजस्थान का अर्थ

परिचय

राजस्थान भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है। यह अपनी समृद्ध संस्कृति, वीरता, ऐतिहासिक दुर्गों, महलों, मरुस्थल, अरावली पर्वतमाला तथा लोककला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

'राजस्थान' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—

  • राजा = शासक या नरेश
  • स्थान = स्थान, भूमि या प्रदेश

अर्थात् राजाओं की भूमि या राजाओं का प्रदेश

इसी कारण राजस्थान को "राजाओं की भूमि", "वीरों की धरती", "शूरवीरों का प्रदेश" तथा "मरुधरा" जैसे नामों से भी जाना जाता है।


राजस्थान को किन-किन नामों से जाना जाता है?

  • राजाओं की भूमि
  • मरुधरा
  • वीरभूमि
  • रंगीला राजस्थान
  • दुर्गों एवं महलों की भूमि
  • खनिजों का अजायबघर
  • ऊँटों का प्रदेश
  • लोकसंस्कृति का गढ़

राजस्थान का महत्व

राजस्थान केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र है।

राजस्थान की पहचान निम्न कारणों से है—

  • भारत का सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल की दृष्टि से)
  • विश्व प्रसिद्ध थार मरुस्थल
  • प्राचीन अरावली पर्वतमाला
  • विशाल दुर्ग एवं महल
  • समृद्ध लोक संस्कृति
  • रंग-बिरंगे मेले एवं उत्सव
  • खनिज संपदा
  • धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत

2. राजस्थान नाम की उत्पत्ति

प्राचीन नाम

वर्तमान राजस्थान का क्षेत्र प्राचीन काल में एक राज्य नहीं था। यह अनेक छोटे-बड़े राज्यों में विभाजित था। विभिन्न कालों में इसे अलग-अलग नामों से जाना गया।

कुछ प्रमुख प्राचीन नाम—

  • मरुकान्तार
  • मरुदेश
  • जांगलदेश
  • मत्स्य
  • मेवाड़
  • मारवाड़
  • शूरसेन
  • ढूँढाड़
  • हाड़ौती
  • वागड़
  • शेखावाटी

इन क्षेत्रों की अपनी अलग संस्कृति, भाषा, शासन व्यवस्था एवं पहचान थी।


'राजस्थान' शब्द का प्रारम्भिक प्रयोग

'राजस्थान' शब्द का प्रयोग सबसे पहले कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान" में किया।

इस पुस्तक में उन्होंने विभिन्न राजपूत रियासतों को सामूहिक रूप से राजस्थान कहा।

बाद में यही नाम पूरे प्रदेश के लिए प्रसिद्ध हो गया।


स्वतंत्रता के बाद

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने विभिन्न देशी रियासतों का एकीकरण किया।

राजपूताना की सभी प्रमुख रियासतों को मिलाकर नए राज्य का गठन किया गया और इसका नाम राजस्थान रखा गया।

3. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

राजस्थान का इतिहास अत्यंत प्राचीन, गौरवशाली एवं वीरता से परिपूर्ण है।

यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक काल से मानव सभ्यता का केंद्र रहा है।


(क) प्रागैतिहासिक काल

राजस्थान में मानव जीवन के सबसे प्राचीन प्रमाण अनेक स्थानों से प्राप्त हुए हैं।

पुरातात्त्विक उत्खननों से यहाँ पत्थर युग के उपकरण, शैलचित्र तथा मानव निवास के प्रमाण मिले हैं।

इससे स्पष्ट होता है कि हजारों वर्ष पूर्व भी यहाँ मानव निवास करता था।


(ख) सिंधु सभ्यता

राजस्थान में सिंधु घाटी सभ्यता के अनेक महत्वपूर्ण स्थल मिले हैं।

प्रमुख स्थल—

  • कालीबंगा (हनुमानगढ़)
  • बालाथल
  • गणेश्वर
  • आहड़

इन स्थलों से नगर नियोजन, कृषि, धातु उद्योग तथा व्यापार के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।


(ग) वैदिक काल

वैदिक काल में राजस्थान के विभिन्न भागों में अनेक जनपद स्थापित हुए।

प्रमुख जनपद—

  • मत्स्य
  • शूरसेन
  • जांगल

(घ) राजपूत काल

सातवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच राजस्थान में अनेक शक्तिशाली राजपूत वंशों का उदय हुआ।

प्रमुख राजवंश—

  • गुहिल (सिसोदिया)
  • चौहान
  • राठौड़
  • कच्छवाहा
  • भाटी
  • परमार

इन्होंने विशाल दुर्ग, महल, मंदिर तथा नगरों का निर्माण कराया।


(ङ) मध्यकाल

मध्यकाल में राजस्थान के अनेक राज्यों का दिल्ली सल्तनत तथा मुगल साम्राज्य से संघर्ष हुआ।

महाराणा प्रताप, राणा सांगा, पृथ्वीराज चौहान तथा दुर्गादास राठौड़ जैसे वीरों ने राजस्थान के इतिहास को गौरव प्रदान किया।


(च) ब्रिटिश काल

ब्रिटिश शासन के समय राजस्थान की अधिकांश रियासतें अंग्रेजों के अधीन संधिबद्ध रियासतें बन गईं।

इन सभी रियासतों को सामूहिक रूप से राजपूताना कहा जाता था।


4. राजस्थान का गठन

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय वर्तमान राजस्थान एक राज्य नहीं था।

यह 19 देशी रियासतों, 3 ठिकानों तथा अजमेर-मेरवाड़ा जैसे क्षेत्रों में विभाजित था।

इन सभी का क्रमिक रूप से विलय करके वर्तमान राजस्थान राज्य का निर्माण किया गया।


राजस्थान के गठन के प्रमुख चरण

राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पूरा हुआ।

इन चरणों में विभिन्न रियासतों को क्रमशः मिलाकर अंततः 1 नवम्बर 1956 को वर्तमान स्वरूप वाला राजस्थान अस्तित्व में आया।

5. राजस्थान दिवस

30 मार्च को प्रत्येक वर्ष राजस्थान दिवस मनाया जाता है।

इसी दिन 30 मार्च 1949 को प्रमुख रियासतों के विलय के बाद वृहद् राजस्थान (Greater Rajasthan) का गठन हुआ।

राजस्थान दिवस पर पूरे राज्य में—

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • लोकनृत्य
  • लोकसंगीत
  • प्रदर्शनी
  • पुरस्कार वितरण
  • ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक आयोजन

आयोजित किए जाते हैं।

6. राजस्थान का सामान्य परिचय

राजस्थान भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित एक विशाल राज्य है।

यह प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है।

सामान्य जानकारी

विषय विवरण
राज्य राजस्थान
राजधानी जयपुर
सबसे बड़ा नगर जयपुर
क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर
भारत में क्षेत्रफल की दृष्टि से स्थान प्रथम
भारत के कुल क्षेत्रफल में भागीदारी लगभग 10.4%
राजभाषा हिन्दी
प्रमुख बोलियाँ मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी, हाड़ौती, शेखावाटी, मेवाती, बागड़ी आदि
राज्य पशु ऊँट (ऊँट एवं चिंकारा – अलग-अलग श्रेणियों में मान्यता)
राज्य पक्षी गोडावण
राज्य वृक्ष खेजड़ी
राज्य पुष्प रोहिड़ा

7. राजस्थान की विशेषताएँ

राजस्थान अनेक भौगोलिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण पूरे भारत में विशिष्ट स्थान रखता है।

भौगोलिक विशेषताएँ

  • भारत का सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल की दृष्टि से)
  • थार मरुस्थल का अधिकांश भाग यहीं स्थित है।
  • अरावली पर्वतमाला राज्य को दो प्राकृतिक भागों में विभाजित करती है।
  • जलवायु मुख्यतः शुष्क एवं अर्ध-शुष्क है।
  • वर्षा का वितरण असमान है।

प्राकृतिक विशेषताएँ

  • समृद्ध खनिज संपदा
  • विविध प्रकार की मिट्टियाँ
  • महत्वपूर्ण नदियाँ एवं झीलें
  • वन एवं वन्यजीव

ऐतिहासिक विशेषताएँ

  • वीर राजपूत शासकों की भूमि
  • विश्व प्रसिद्ध दुर्ग एवं महल
  • प्राचीन मंदिर एवं ऐतिहासिक स्मारक

सांस्कृतिक विशेषताएँ

  • रंग-बिरंगी वेशभूषा
  • लोकनृत्य एवं लोकसंगीत
  • हस्तशिल्प एवं चित्रकला
  • मेले एवं उत्सव
  • अतिथि सत्कार की समृद्ध परंपरा

आर्थिक विशेषताएँ

  • खनिज उत्पादन में अग्रणी
  • पर्यटन का प्रमुख केंद्र
  • संगमरमर एवं पत्थर उद्योग
  • कृषि एवं पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान
  • सौर ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएँ
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