Advertisement
⏱️ 7 min read

जैसलमेर दुर्ग (सोनार किला) एवं ढाई साके | इतिहास, उपनाम और महत्वपूर्ण तथ्य

N
By NotesMind
Advertisement

जैसलमेर दुर्ग (सोनार किला) एवं ढाई साके

राजस्थान के मरुस्थलीय वैभव, राजपूती शौर्य और अद्वितीय स्थापत्य की बात हो और Jaisalmer Fort का नाम न आए, यह संभव नहीं। जैसलमेर दुर्ग केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध दुर्गों में गिना जाता है। पीले स्वर्णिम पत्थरों से निर्मित होने के कारण यह सूर्य की किरणों में सोने की तरह दमकता है, इसी कारण इसे सोनार किला या स्वर्ण दुर्ग कहा जाता है।

यह दुर्ग मरुस्थल के मध्य स्थित होने के बावजूद केवल सुरक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि व्यापार, संस्कृति, कला और सैन्य शक्ति का भी प्रमुख केंद्र रहा। अपनी विशाल प्राचीरों, ऊँची बुर्जों, प्राचीन हवेलियों, मंदिरों और वीरता से जुड़े ढाई साकों के कारण यह दुर्ग राजस्थान के गौरव का अनुपम प्रतीक है।


जैसलमेर दुर्ग का परिचय

जैसलमेर दुर्ग त्रिकूट या मेरू पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण Rawal Jaisal ने 12 जुलाई 1155 ईस्वी को आरंभ करवाया।

रावल जैसल की मृत्यु के बाद इसका अधिकांश निर्माण उनके पुत्र एवं उत्तराधिकारी शालिवाहन द्वितीय ने पूर्ण करवाया।


जैसलमेर दुर्ग के उपनाम

जैसलमेर दुर्ग अनेक उपनामों से प्रसिद्ध है—

  • सोनार किला
  • त्रिकूटगढ़
  • रेगिस्तान का गुलाब
  • गलियों का दुर्ग
  • जैसाणगढ़
  • स्वर्ण गिरी
  • पश्चिमी सीमा का प्रहरी
  • त्रिकूटांचल
  • गोरहरागढ़
  • सोनगिरी
  • द गोल्डन फोर्ट
  • राजस्थान का अंडमान
  • भाटी भड़-किवाड़

ये सभी नाम इसकी महिमा को दर्शाते हैं।


निर्माण एवं स्थापत्य

पीले पत्थरों से निर्मित दुर्ग

यह दुर्ग पीले बलुआ पत्थरों से बना है, जो सूर्य की रोशनी में स्वर्णिम आभा देता है।

इसी कारण इसे Golden Fort भी कहा जाता है।

चूने का प्रयोग नहीं

विशेष बात यह है कि इसके निर्माण में चूने का प्रयोग नहीं किया गया।

लकड़ी की छत वाला दुर्ग

यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा दुर्ग माना जाता है जिसकी छत लकड़ी की बनी हुई है।


जैसलमेर दुर्ग की विशेषताएँ

राजस्थान का दूसरा सबसे पुराना किला

इसे राजस्थान का दूसरा सबसे प्राचीन किला माना जाता है।


लिविंग फोर्ट

चित्तौड़गढ़ के बाद यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा Living Fort माना जाता है।

आज भी किले के भीतर आबादी निवास करती है।


99 बुर्जें

दुर्ग में कुल 99 बुर्जें हैं, जो इसकी सैन्य शक्ति का परिचायक हैं।


शेर के समान प्रतीत होने वाला दुर्ग

कहा जाता है यह विशाल दुर्ग अंगड़ाई लेते हुए शेर के समान प्रतीत होता है।


2009 का भूकंप

2009 में आए भूकंप से इस दुर्ग में दरारें पड़ गई थीं।


जैसलमेर दुर्ग से जुड़ी प्रसिद्ध कहावतें

प्रसिद्ध कहावत

"घोड़ा कीजे काठ का, पग कीजे पाषाण
अख्तर कीजे लोहे का, तब पहुंचे जैसाण।"

अर्थात जैसलमेर पहुंचना अत्यंत कठिन था।


दूसरी कहावत

गढ़ दिल्ली गढ़ आगरो, अधगढ़ बीकानेर
भलो चुनायो भाटियों, सिरे तो जैसलमेर।

यह दुर्ग निर्माण की श्रेष्ठता को दर्शाती है।


अबुल फजल का कथन

Abu'l-Fazl ने कहा—

“ऐसा दुर्ग जहाँ पहुँचने के लिए पत्थर की टाँगें चाहिए।”


जैसलमेर दुर्ग के प्रमुख प्रवेश द्वार

दुर्ग के प्रमुख पोल—

  • अक्षय पोल
  • सूरजपोल
  • गणेश पोल
  • हवापोल

ये सभी द्वार सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण थे।


जैसलू का कुआँ

दुर्ग के भीतर जैसलू का कुआँ स्थित है, जो जल प्रबंधन की अद्भुत मिसाल है।


प्रमुख आकर्षण

मंदिर और हवेलियाँ

दुर्ग में कई जैन मंदिर और राजमहल स्थित हैं।

संकरी गलियाँ

इसी कारण इसे गलियों का दुर्ग भी कहा जाता है।


सत्यजीत रे और सोनार किला

Satyajit Ray ने इस दुर्ग पर सोनार किला नामक प्रसिद्ध फिल्म बनाई।


डाक टिकट

2009 में इस दुर्ग पर पाँच रुपये का डाक टिकट जारी किया गया।


यूनेस्को विश्व धरोहर

2013 में UNESCO ने जैसलमेर दुर्ग को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया।


जैसलमेर दुर्ग : पश्चिमी सीमा का प्रहरी

मरुस्थल में स्थित होने के कारण यह दुर्ग पश्चिमी सीमा की सुरक्षा का प्रहरी माना जाता था।

व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण के कारण इसका सामरिक महत्व अत्यधिक था।


जैसलमेर के ढाई साके

जैसलमेर दुर्ग की वीरता का सबसे गौरवशाली अध्याय इसके ढाई साके हैं।


प्रथम साका

मूलराज और अलाउद्दीन खिलजी का युद्ध

लगभग 1313 ईस्वी में भाटी शासक मूलराज और दिल्ली सुल्तान Alauddin Khalji के बीच युद्ध हुआ।

परिणाम

  • मूलराज ने केसरिया किया
  • रानियों ने जौहर किया

यह जैसलमेर का प्रथम साका कहलाता है।


द्वितीय साका

रावल दूदा और फिरोजशाह तुगलक

1357 ईस्वी में रावल दूदा (महारावल दुर्जनसाल) और Firoz Shah Tughlaq के बीच युद्ध हुआ।

परिणाम

  • वीरों ने केसरिया किया
  • स्त्रियों ने जौहर किया

यह जैसलमेर का दूसरा साका था।


तृतीय अर्द्ध साका (आधा साका)

राव लूणकरण और अमीर अली

1550 ईस्वी में जैसलमेर के राव लूणकरण और कंधार के राज्यच्युत शासक अमीर अली के मध्य युद्ध हुआ।

क्या हुआ?

  • वीरों ने केसरिया किया
  • परन्तु जौहर नहीं हुआ

इसी कारण इसे अर्द्ध साका कहा गया।


ढाई साके क्यों कहा जाता है?

  • दो पूर्ण साके
  • एक आधा (अर्द्ध) साका

इसलिए इसे ढाई साके कहा जाता है।


सामरिक महत्व

जैसलमेर दुर्ग का महत्व—

व्यापारिक दृष्टि से

  • रेशम मार्ग से संबंध
  • पश्चिमी व्यापार नियंत्रण

सैन्य दृष्टि से

  • सीमा सुरक्षा
  • मरुस्थलीय रक्षा

सांस्कृतिक दृष्टि से

  • भाटी शासकों की राजधानी
  • कला और स्थापत्य केंद्र

स्थापत्य विशेषताएँ

राजपूती शैली

  • विशाल परकोटे
  • ऊँची बुर्जें
  • मजबूत पोल

जल प्रबंधन

  • जैसलू का कुआँ
  • प्राचीन जल स्रोत

आवासीय दुर्ग

यह जीवित दुर्ग होने के कारण अद्वितीय है।


जैसलमेर दुर्ग का ऐतिहासिक महत्व

यह दुर्ग—

  • भाटी राजपूत गौरव का प्रतीक
  • मरुस्थल की स्वर्ण नगरी
  • वीरता और जौहर की भूमि
  • पश्चिमी सीमा का प्रहरी
  • विश्व धरोहर है।

चूरू, भानगढ़, सिवाना, जयगढ़, अचलगढ़ एवं शेरगढ़ दुर्ग

राजस्थान के दुर्ग केवल राजधानियों और बड़े राज्यों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि छोटे-छोटे राज्यों, सीमांत क्षेत्रों तथा जागीरी सत्ता के केंद्रों में भी अनेक ऐसे दुर्ग बने जिन्होंने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। Rajasthan के चूरू, भानगढ़, सिवाना, जयगढ़, अचलगढ़ और शेरगढ़ दुर्ग ऐसे ही गौरवशाली दुर्ग हैं, जो वीरता, रहस्य, स्थापत्य, सामरिक शक्ति और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं।

इन दुर्गों में कहीं चांदी के गोले दागने की कथा है, कहीं भूतहा नगर की रहस्यमयता, कहीं साके और जौहर की वीरगाथाएं, तो कहीं एशिया की सबसे बड़ी तोप का इतिहास।


1. चूरू का किला

Churu Fort राजस्थान के अद्वितीय दुर्गों में गिना जाता है।

निर्माण

चूरू किले का निर्माण 1739 ईस्वी में ठाकुर कुशाल सिंह द्वारा करवाया गया।


चांदी के गोले दागने वाला किला

यह किला अपने अनोखे इतिहास के कारण अत्यंत प्रसिद्ध है।

जब युद्ध के दौरान गोला-बारूद समाप्त हो गया, तब किले के ठाकुरों ने अपनी रक्षा हेतु चांदी के गोले बनाकर शत्रुओं पर दागे।

इसी कारण चूरू का किला—

"चांदी के गोले दागने वाला किला"

कहलाता है।


ऐतिहासिक महत्व

  • शौर्य और आत्मसम्मान का प्रतीक
  • राजपूती स्वाभिमान की मिसाल
  • युद्धनीति और साहस का अद्भुत उदाहरण

2. भानगढ़ दुर्ग

Bhangarh Fort राजस्थान के सबसे रहस्यमय और चर्चित दुर्गों में से एक है।


उपनाम

भानगढ़ दुर्ग अनेक नामों से प्रसिद्ध है—

  • खंडहरों का नगर
  • भूतहा किला

स्थिति

यह दुर्ग अलवर जिले की राजगढ़ तहसील में सांवण नदी के तट पर सरिस्का अभयारण्य में स्थित है।


निर्माण

भानगढ़ दुर्ग का निर्माण 1573 ईस्वी में आमेर के राजा
Bhagwant Das
ने करवाया।


भानगढ़ और अजबगढ़

भानगढ़ और अजबगढ़ को—

इतिहास और पुरातत्व का खजाना

कहा जाता है।


विशेषताएँ

  • रहस्यमय स्थापत्य
  • विशाल खंडहर
  • प्राचीन मंदिर
  • सामरिक पहाड़ी दुर्ग

भानगढ़ की प्रसिद्धि

यह दुर्ग इतिहास के साथ-साथ लोककथाओं और रहस्य कथाओं के लिए भी प्रसिद्ध है।


3. सिवाना दुर्ग

Siwana Fort राजस्थान के वीरता और बलिदान के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।


उपनाम

  • जालौर दुर्ग की कुंजी
  • मारवाड़ के राजाओं की शरणस्थली
  • खैराबाद
  • संकटकालीन राजधानी

निर्माण

यह दुर्ग बाड़मेर के सिवाना क्षेत्र में छप्पन पहाड़ियों की हल्देश्वर पहाड़ी पर वीर नारायण पंवार द्वारा निर्मित माना जाता है।

इसे कूमट दुर्ग भी कहा जाता है।


जयनारायण व्यास

Jayanarayan Vyas को यहाँ बंदी बनाकर रखा गया था।


सिवाना दुर्ग के दो साके

प्रथम साका (1308 ई.)

अलाउद्दीन की सेना का आक्रमण

1308 ईस्वी में Alauddin Khalji की सेना ने कमालुद्दीन गर्ग के नेतृत्व में सिवाना पर आक्रमण किया।

उस समय शासक शीतलदेव (सातलदेव) था।


वीर सेनापति भावले पंवार

शीतलदेव के वीर सेनापति भावले पंवार थे।

जब लंबे समय तक विजय नहीं मिली तो छल से भावले पंवार को अपने पक्ष में कर गुप्त रास्ते ज्ञात किए गए।


युद्ध और जौहर

  • शीतलदेव और सोम वीरगति को प्राप्त हुए
  • दुर्ग की स्त्रियों ने जौहर किया

जल स्रोत को दूषित करना

अलाउद्दीन की सेना ने
भांडेलाव तालाब
में गौमांस/गौरक्त मिलाकर जल दूषित कर दिया।

यह युद्धनीति का क्रूर उदाहरण माना जाता है।


खैराबाद नाम

विजय के बाद अलाउद्दीन ने सिवाना का नाम बदलकर खैराबाद रख दिया।


द्वितीय साका

1600 के आसपास मुगल बादशाह अकबर ने जोधपुर के मोटा राजा उदयसिंह के नेतृत्व में सिवाना पर आक्रमण करवाया।

उस समय शासक वीर कल्ला रायमलोत (कल्याणमल) थे।

परिणाम

  • वीर कल्ला वीरगति को प्राप्त हुए
  • हाड़ी रानी ने अन्य स्त्रियों संग जौहर किया

यह सिवाना का दूसरा साका था।


4. जयगढ़ दुर्ग

Jaigarh Fort राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक दुर्गों में गिना जाता है।


उपनाम

  • चिल्ह का टीला
  • संकटमोचक दुर्ग

निर्माण

16वीं शताब्दी में Man Singh I ने निर्माण करवाया।

1726 ईस्वी में Sawai Jai Singh II ने वर्तमान स्वरूप दिया।

वास्तुकार—
Vidyadhar Bhattacharya


जयगढ़ नामकरण

मिर्जा राजा जयसिंह के नाम पर इसका नाम जयगढ़ पड़ा।


एशिया की सबसे बड़ी तोप

जयबाण तोप

Jaivana Cannon विश्व प्रसिद्ध है।

  • एशिया की सबसे बड़ी तोप
  • नाली लंबाई 20.2 फुट

किंवदंती

कहा जाता है एक बार चलने पर उसका गोला चाकसू में गिरा जहाँ गोलेराव तालाब बना।


तोप ढालने का कारखाना

जयगढ़ भारत का एकमात्र दुर्ग माना जाता है जहाँ एशिया का सबसे बड़ा तोप ढालने का कारखाना था।


विजयगढ़ी

दुर्ग में लघु दुर्ग विजयगढ़ी भी स्थित है।

यहाँ—

  • राजकीय खजाना
  • कैदी

रखे जाते थे।


दिवाबुर्ज

सात मंजिला प्रकाश स्तम्भ दिवाबुर्ज दुर्ग की प्रमुख विशेषता है।


प्रमुख द्वार

  • डूंगर द्वार
  • भैरु द्वार
  • अवनि द्वार

दफीना कथा

मान्यता है कि कछवाहा राजकोष यहां छिपा था।

1975 में
Indira Gandhi
ने इसकी खोज हेतु खुदाई करवाई।


5. अचलगढ़ दुर्ग

Achalgarh Fort राजस्थान के प्राचीन पर्वतीय दुर्गों में प्रमुख है।


उपनाम

आर्बुद दुर्ग


स्थिति

आबू पर्वत पर मंदाकिनी झील के किनारे स्थित।


निर्माण

प्रारंभिक निर्माण परमार शासकों द्वारा।

1452 ईस्वी में
Rana Kumbha
ने पुनर्निर्माण करवाया।


दर्शनीय स्थल

  • अंकलेश्वर महादेव मंदिर
  • कपूर सागर तालाब
  • सावन-भादो झील
  • ओखा रानी का महल

महत्व

  • धार्मिक स्थल
  • गिरी दुर्ग
  • राजपूती स्थापत्य का उदाहरण

6. शेरगढ़ दुर्ग

Shergarh Fort राजस्थान के अद्वितीय सीमांत दुर्गों में गिना जाता है।


निर्माण

प्रारंभिक निर्माण कुषाण वंशीय शासक मालदेव द्वारा 1540 ईस्वी में।

बाद में पाल वंश के धोरपाल/देवीपाल द्वारा पुनर्निर्माण।

फिर
Sher Shah Suri
ने जीर्णोद्धार कराया।

इसी कारण नाम पड़ा— शेरगढ़


उपनाम

  • दक्षिण का द्वारगढ़
  • धोलदेहरागढ़
  • धौलपुर दुर्ग

विशेषता

राजस्थान का एकमात्र ऐसा दुर्ग—

जो राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमाओं पर स्थित है।


राजधानी

यह धौलपुर के प्रथम राजा कीरतसिंह की राजधानी था।


सांप्रदायिक सद्भाव

यह दुर्ग सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी प्रसिद्ध है।


ध्यान योग्य

बारां जिले में भी शेरगढ़ नाम का एक अन्य किला स्थित है।


इन दुर्गों का सामूहिक महत्व

इन सभी दुर्गों की विशेषताएँ—

वीरता

  • साके
  • जौहर
  • युद्धगाथाएं

स्थापत्य

  • पर्वतीय दुर्ग
  • सीमांत दुर्ग
  • तोपखाना
  • जल प्रबंधन

सांस्कृतिक महत्व

  • मंदिर
  • लोककथाएँ
  • धरोहर

बूंदी, अजयमेरु, आमेर, नाहरगढ़, गागरोन, जूनागढ़ और मेहरानगढ़ दुर्ग

राजस्थान के दुर्ग केवल युद्ध और सुरक्षा के केंद्र नहीं रहे, बल्कि वे कला, संस्कृति, स्थापत्य, वीरता और राजसी वैभव के प्रतीक भी रहे हैं। Rajasthan के बूंदी, अजयमेरु, आमेर, नाहरगढ़, गागरोन, जूनागढ़ और मेहरानगढ़ जैसे दुर्ग अपने-अपने इतिहास, स्थापत्य कला, साकों, महलों और शौर्यगाथाओं के कारण विशिष्ट स्थान रखते हैं।


1. बूंदी का किला (तारागढ़ दुर्ग)

Taragarh Fort Bundi राजस्थान के सबसे प्राचीन एवं रहस्यमय दुर्गों में गिना जाता है।

उपनाम

  • तारागढ़ दुर्ग
  • तिलस्मी किला

निर्माण

बूंदी किले का निर्माण देवीसिंह हाड़ा / बरसिंह हाड़ा ने 14वीं शताब्दी में करवाया।


रुडयार्ड किपलिंग की टिप्पणी

Rudyard Kipling ने कहा—

“यह दुर्ग मानो मनुष्यों ने नहीं, प्रेतों ने बनाया हो।”


प्रमुख विशेषताएँ

भित्ति चित्र

बूंदी दुर्ग अपने अद्भुत भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।

गर्भ गुंजन तोप

दुर्ग में प्रसिद्ध गर्भ गुंजन तोप रखी हुई है।

भीम बुर्ज

विशाल भीम बुर्ज इसकी प्रमुख सैन्य संरचनाओं में है।

रानीजी की बावड़ी

राव अनिरुद्ध सिंह द्वारा निर्मित।


रंग विलास चित्रशाला

रंग विलास (चित्रशाला) का निर्माण उम्मेद सिंह हाड़ा ने करवाया।

यह राजस्थानी चित्रकला का उत्कृष्ट केंद्र है।


प्रमुख दर्शनीय स्थल

  • छत्र महल
  • दिवान-ए-आम
  • नौबत खाना
  • रतन महल
  • अनिरुद्ध महल
  • फूल महल
  • बादल महल
  • सिलहखाना

2. अजयमेरु दुर्ग (तारागढ़, अजमेर)

Taragarh Fort Ajmer राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दुर्गों में से है।


निर्माण

इसका निर्माण अजयपाल चौहान ने सातवीं शताब्दी में करवाया।


उपनाम

  • अजयमेरु दुर्ग
  • गढ़ बिठली
  • राजपूताना की कुंजी
  • राजस्थान का जिब्राल्टर

Bishop Heber ने इसे राजस्थान का जिब्राल्टर कहा।


विशेषताएँ

14 बुर्ज

दुर्ग में कुल 14 बुर्ज हैं।

सर्वाधिक आंतरिक आक्रमण सहने वाला दुर्ग

इसे आंतरिक संघर्षों का साक्षी माना जाता है।


चश्मा-ए-नूर

जहांगीर ने इसकी घाटी में चश्मा-ए-नूर महल बनवाया।


प्रसिद्ध बुर्ज

  • गूगड़ी
  • बांदरा
  • घूंघट
  • इमली

दाराशिकोह से संबंध

Dara Shikoh का जन्म यहीं हुआ माना जाता है।


प्रमुख दर्शनीय स्थल

  • मिरान साहब की दरगाह
  • घोड़े की मजार
  • रूठी रानी महल
  • पृथ्वीराज स्मारक
  • नानाजी का झालरा
  • चामुंडा मंदिर

3. आमेर का किला

Amber Fort राजस्थान की स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है।


उपनाम

  • अम्बावती नगरी
  • अम्बरीशपुर
  • अंबर दुर्ग

निर्माण

1150 ईस्वी में दूल्हेराय द्वारा।

पुनर्निर्माण—
Man Singh I


प्रमुख स्थल

मावठा झील

Maota Lake

दिलाराम बाग

शिलादेवी मंदिर

शीशमहल

अन्य आकर्षण

  • सुहाग मंदिर
  • केसर क्यारी
  • भूलभुलैया
  • दीवाने आम
  • दीवाने खास

जनाना देहरी

यहां रानी माताएं और राजाओं की रानियाँ रहती थीं।


यूनेस्को धरोहर

2013 में यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल।


4. नाहरगढ़ दुर्ग

Nahargarh Fort जयपुर की रक्षा का प्रमुख दुर्ग रहा है।


निर्माण

1734 ई. में
Sawai Jai Singh II
ने करवाया।


उपनाम

  • जयपुर का मुकुट
  • सुदर्शनगढ़
  • टाइगर किला
  • महलों का दुर्ग

नामकरण

लोकदेवता नाहरसिंह भोमिया के नाम पर।


विशेषता

माधोसिंह ने अपनी 9 रानियों हेतु 9 महल बनवाए।


5. गागरोन दुर्ग

Gagron Fort राजस्थान का प्रसिद्ध जलदुर्ग है।


उपनाम

  • जलदुर्ग
  • डोडगढ़
  • मुस्तफाबाद
  • उदकगढ़

निर्माण

7-8वीं शताब्दी में डोडा राजपूतों द्वारा।

कालीसिंध और आहू नदियों के संगम पर।


विशेषता

राजस्थान का एकमात्र—

बिना नींव चट्टान पर खड़ा दुर्ग


सूफी दरगाह

Dargah of Hamiduddin Chishti


गागरोन के दो साके

प्रथम साका (1423)

अचलदास खींची बनाम अलपखां

  • अचलदास ने केसरिया
  • रानी उमादे ने जौहर

द्वितीय साका

महमूद खिलजी प्रथम बनाम पाल्हणसी


6. जूनागढ़ किला

Junagarh Fort राजस्थान का भव्य भूमि दुर्ग है।


उपनाम

  • बीकानेर का किला
  • राती-घाटी का किला
  • जमीन का जेवर
  • अधगढ़

निर्माण

1594 ईस्वी

निर्माता—
Raja Rai Singh


लाल पत्थरों का दुर्ग

पूरा किला लाल पत्थरों से निर्मित है।


प्रमुख महल

  • फूल महल
  • करण महल
  • चंद्र महल
  • अनूप महल
  • बादल महल
  • सरदार निवास

करणपोल

मुख्य द्वार।

सूरजपोल

जयमल और पत्ता की मूर्तियाँ स्थापित।


7. मेहरानगढ़ दुर्ग

Mehrangarh Fort राजस्थान के सबसे भव्य दुर्गों में प्रमुख है।


निर्माण

1459 ईस्वी

निर्माता—
Rao Jodha

नींव—
Karni Mata द्वारा।


उपनाम

  • सूर्यगढ़
  • चिड़िया टूंक दुर्ग
  • गढ़ चिंतामणि
  • कागमुखी

प्रमुख स्थल

चामुंडा माता मंदिर

नागणेची माता मंदिर

फूल महल

मोती महल


तीन प्रसिद्ध तोपें

  • गजनी खां
  • शंभूबाण
  • किलकिला

पुस्तक प्रकाश भवन

शाही पुस्तकालय।


वीरगाथाएँ

यह दुर्ग वीर शिरोमणि
Durgadas Rathore
से जुड़ा हुआ है।


रुडयार्ड किपलिंग की टिप्पणी

उन्होंने कहा—

“मानो परियों और फरिश्तों ने इसका निर्माण किया हो।”

Advertisement

💬 Leave a Comment & Rating