झालावाड़ से उदयपुर तक के प्रमुख मंदिर 2025: खाटू श्याम, दिलवाड़ा, श्रीनाथजी, एकलिंगजी और अनेक तीर्थों की सम्पूर्ण गाइड
झालावाड़ से उदयपुर तक: राजस्थान के प्रमुख मंदिरों की सम्पूर्ण आस्था यात्रा
राजस्थान के झालावाड़, झुंझुनूं, जोधपुर, करौली, कोटा, नागौर, पाली, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, टोंक और उदयपुर जिलों में स्थित मंदिर न केवल अद्भुत स्थापत्य कला के उदाहरण हैं, बल्कि गहरी आस्था और चमत्कारी मान्यताओं के केंद्र भी हैं। आइये, इन मंदिरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।
झालावाड़ जिले के प्रमुख मंदिर
शीतलेश्वर (चंद्रमौलेश्वर) महादेव मंदिर
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झालावाड़ में चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित इस गुप्तकालीन मंदिर का निर्माण राजा दुर्गण के सामंत वाप्पक ने 689 ईस्वी में करवाया।
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यह एक अर्धनारीश्वर मंदिर (आधा शिव, आधा पार्वती) है, जिसमें लकुलीश की काले पत्थर की सुंदर प्रतिमा है।
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मंदिर की सबसे आकर्षक संरचना कीचक है, जो सभामंडप के स्तंभों पर विशाल पट्टिकाओं को जोड़ती है।
पद्मनाथ मंदिर (झालरापाटन का वैष्णव मंदिर)
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इस मंदिर को सात सहेलियों का मंदिर और घंटियों का मंदिर भी कहते हैं। कर्नल जेम्स टॉड ने इसे चारभुजा का मंदिर कहा।
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यह कच्छपघात शैली का उत्कृष्ट नमूना है।
चांदखेड़ी का जैन मंदिर
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झालावाड़ के खानपुर में स्थित यह मंदिर भूगर्भ में बना हुआ है। इसमें आदिनाथ की विशाल प्रतिमा विराजमान है।
झालरापाटन का शांतिनाथ जैन मंदिर
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कच्छपघात शैली में निर्मित इस मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर की आदमकद शांतिनाथ दिगंबर जैन प्रतिमा है।
झालावाड़ के अन्य प्रमुख मंदिर
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चंद्रभागा मंदिर: नदी तट पर स्थित, कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला।
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आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर: चांदखेड़ी में भगवान आदिनाथ की पद्मासन प्रतिमा।
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द्वारकाधीश मंदिर: जालिम सिंह द्वारा गोमती सागर के पास बनवाया गया।
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सूर्य मंदिर (झालरापाटन): राजस्थान का सबसे प्राचीन सूर्य मंदिर, जहाँ सूर्य भगवान के घुटने तक जूते पहने प्रतिमा है।
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नागेश्वर पार्श्वनाथ: चौमहला क्षेत्र में स्थित।
झुंझुनूं जिले के प्रमुख मंदिर
रानी सती का मंदिर
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अग्रवाल जाति की रानी सती (वास्तविक नाम: नारायणी) का यह मंदिर झुंझुनूं में स्थित है।
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यह विश्व का सबसे बड़ा सती मंदिर है और अग्रवालों की कुलदेवी मानी जाती हैं।
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इन्हें चावों की देवी, शक्तिपीठ, दादीजी भी कहते हैं।
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भाद्रपद अमावस्या को यहाँ प्रसिद्ध मेला भरता है।
सकराय माता का मंदिर (उदयपुरवाटी, झुंझुनूं)
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सकराय माता खण्डेलवालों की कुलदेवी हैं। अकाल के समय फल-सब्जियाँ उगाने के कारण ये शाकंभरी कहलाईं।
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यह पहली माता हैं जिन्हें इंटरनेट पर जारी किया गया। नवरात्रों में मेला लगता है और पुजारी नाथ संप्रदाय का होता है।
रघुनाथ चुंडावत जी का मंदिर
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खेतड़ी (झुंझुनूं) में स्थित इस मंदिर में राम एवं लक्ष्मण की दाढ़ी-मूंछ वाली प्रतिमा स्थापित है, जो विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है।
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निर्माण बख्तावर की पत्नी चुंडावत ने करवाया था।
जोधपुर जिले के प्रमुख मंदिर
सच्चियाय माता का मंदिर, ओसियां
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ओसिया (जोधपुर) में स्थित इस मंदिर में माता की पूजा हिंदू और ओसवाल समाज समान रूप से करते हैं।
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यह मंदिर महिषमर्दिनी की सजीव प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।
महामंदिर, जोधपुर
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नाथ सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ, जिसका निर्माण 1812 ईस्वी में जोधपुर नरेश महाराजा मानसिंह ने करवाया।
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यह मंदिर 84 खंभों पर निर्मित है।
अधरशिला रामदेव मंदिर
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जालोरिया का बास, जोधपुर में एक सीधी चट्टान पर स्थित बाबा रामदेव का मंदिर।
संबोधीधाम, जोधपुर
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कायलाना झील के पास जैन धर्मावलंबियों द्वारा निर्मित यह धाम अत्यंत आकर्षक है।
जोधपुर के अन्य शीर्ष मंदिर
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चामुंडा देवी मंदिर (मेहरानगढ़)
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बाणगंगा मंदिर (बिलाड़ा)
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मुरली मनोहर मंदिर (मेहरानगढ़)
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गंगश्याम मंदिर (जोधपुर)
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लटियालजी का जैन मंदिर (कापरड़ा)
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आईमाता (बिलाड़ा)
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महामंदिर (जोधपुर)
करौली जिले के प्रमुख मंदिर
केला देवी मंदिर
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करौली के त्रिकूट पर्वत की घाटी में कालीसिल नदी के किनारे स्थित।
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निर्माण गोपालसिंह द्वारा 19वीं शताब्दी में करवाया गया। केला देवी करौली के यदुवंशी राजवंश की कुलदेवी थीं।
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मंदिर के सामने बोहरा भक्त की छतरी है। भक्ति में लांगुरिया लोकगीत गाए जाते हैं।
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चैत्र शुक्ल अष्टमी को प्रसिद्ध लक्खी मेला भरता है।
श्री महावीर जी का मंदिर
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करौली में स्थित यह मंदिर सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों के सद्भाव का प्रतीक है।
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लाल पत्थर और संगमरमर के योग से चतुष्कोण आकार में निर्मित।
मदन मोहनजी का मंदिर
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मदनमोहनजी की मूर्ति वृन्दावन से मुस्लिम आक्रांताओं से बचाकर लाई गई थी।
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मंदिर का निर्माण 1748 ईस्वी में हुआ।
अंजनी माता का मंदिर
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यहाँ भारत की एकमात्र प्रतिमा है जिसमें अंजनी माता श्री हनुमान जी को स्तनपान कराती हुई दिखाई गई हैं।
कोटा जिले के प्रमुख मंदिर
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विभीषण मंदिर, कैथून (कोटा): यह भारत का एकमात्र विभीषण मंदिर है।
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कंसुआ का शिव मंदिर: आठवीं शताब्दी का गुप्तोत्तरकालीन मंदिर, मान्यता है कि यहाँ कण्व ऋषि का आश्रम था। यहाँ सहस्त्र शिवलिंग स्थापित है।
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मुकंदरा का शिव मंदिर: राजस्थान का गुप्तकालीन शिव मंदिर।
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भीम चौरी मंदिर: दर्रा मुकंदरा के बीच स्थित गुप्तकालीन शिव मंदिर, जिसे भीम का मंडप माना जाता है।
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चारचौमा का शिवालय: कोटा के चारचौमा गांव में गुप्तकालीन शिव मंदिर।
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बूढ़ादीत का सूर्य मंदिर: दीगोद (कोटा) में पंचायतन शैली में निर्मित।
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गेपरनाथ शिवालय: कोटा-रावतभाटा मार्ग पर गुप्तकालीन मंदिर।
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मथुराधीश मंदिर: पाटनपोल के पास, वल्लभाचार्य संप्रदाय की प्रथम महाप्रभु की पीठिका, राजा शिवगण ने बनवाया।
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त्रिकाल चौबीसी मंदिर: कोटा जिले में तीन कालों के 72 तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ विराजमान।
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खुटुंबरा शिव मंदिर: प्राचीन मंदिर जो उड़ीसा के मंदिरों के शिखरों से साम्य रखता है।
नागौर जिले के प्रमुख मंदिर
कैवाय माता का मंदिर
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नागौर जिले में परबतसर के पास किणसरिया गांव की पर्वत चोटी पर स्थित अति प्राचीन मंदिर।
भांवल माता का मंदिर
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मेड़ता तहसील से 20 किमी दूर भांवल गांव में। नवरात्र की अष्टमी को मेला, यहाँ चामुंडा और महिषमर्दिनी स्वरूपों की पूजा होती है।
दधिमती माता का मंदिर
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दाहिमा/दाधीच ब्राह्मणों की आराध्य देवी। यह प्रतिहारकालीन महामारु शैली का मंदिर जायल तहसील के गोठ-मांगलोद गांव की सीमा पर है।
अन्य प्रमुख मंदिर
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बंशीवाले का मंदिर (मुरलीधर): नागौर जिले में।
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चारभुजानाथ मंदिर, मेड़ता: राव दूदा द्वारा स्थापित, यहाँ संत तुलसीदास, मीराबाई, संत रैदास की आदमकद प्रतिमाएँ हैं।
प्रतापगढ़ जिले के प्रमुख मंदिर
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भंवरमाता का मंदिर: छोटी सादड़ी तहसील में।
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गोमतेश्वर मंदिर: अरनोद तहसील में।
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सीतामाता का मंदिर: सीतामाता अभयारण्य में स्थित।
पाली जिले के प्रमुख मंदिर
चौमुखा जैन मंदिर, रणकपुर
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पाली की देसूरी तहसील में स्थित यह श्वेतांबर जैन मंदिर 1439 ईस्वी में धरणकशाह ने शिल्पी देपा की देखरेख में बनवाया।
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1444 स्तंभों पर खड़ा यह मंदिर माद्री पर्वत की छाया में है। यहाँ भगवान आदिनाथ विराजमान हैं।
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विशेषता: किसी भी कोने से दर्शन करने पर कोई स्तंभ आड़े नहीं आता, इसलिए इसे चतुर्मुख जिन प्रासाद भी कहते हैं।
गौतमेश्वर मंदिर
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सुकड़ी नदी के किनारे स्थित। मीणा जनजाति के लोग इन्हें इष्ट देव मानते हैं और भूरिया बाबा कहते हैं।
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मेले में मीणा लोग अपने पूर्वजों की अस्थियाँ सुकड़ी नदी में विसर्जित करते हैं।
पाली के अन्य जैन एवं प्राचीन मंदिर
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राता महावीर: स्थापत्य कला की तुलना रणकपुर से की जाती है।
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सोमनाथ मंदिर, पाली: निर्माण वि.सं. 1209 में गुजरात के राजा कुमारपाल सोलंकी ने करवाया।
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मूंछला महावीर मंदिर: यहाँ मूंछों वाले महावीर स्वामी की प्रतिमा है।
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सांडेराव का शांतिनाथ जिनालय: पांडवों के वंशधर गंधर्वसेन द्वारा निर्मित।
राजसमंद जिले के प्रमुख मंदिर
द्वारिकाधीश मंदिर, कांकरोली
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पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय का प्रसिद्ध मंदिर, जहाँ भगवान कृष्ण की प्रतिमा है।
श्रीनाथजी मंदिर, श्री नाथद्वारा
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वल्लभ संप्रदाय के वैष्णवों का प्रमुख तीर्थ। काले मार्बल की प्रतिमा मथुरा से लाकर स्थापित की गई थी।
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मंदिर का निर्माण महाराणा राज सिंह के काल में हुआ।
गढ़बोर का चारभुजा नाथ मंदिर
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चमत्कारी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध, यहाँ होली और देवझुलनी एकादशी पर मेला होता है। पास से गोमती नदी बहती है।
अन्य मंदिर
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घेवर माता का मंदिर: राजसमंद झील की पाल पर।
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चारभुजा देवी का मंदिर: खमनोर में।
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पिपलाज माता का मंदिर: गुहिल सम्राट अल्लट के शासनकाल में निर्मित।
सवाई माधोपुर जिले के प्रमुख मंदिर
गणेश मंदिर, रणथम्भौर
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सवाई माधोपुर के रणथम्भौर में स्थित इस मंदिर में गणपति की मात्र मुख वाली प्रतिमा (बिना शरीर, हाथ) विराजमान है।
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भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) को प्रतिवर्ष गणेश मेला भरता है।
चमत्कारी जी का मंदिर (आलनपुर)
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इसमें भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा है और शरद पूर्णिमा को मेला लगता है।
घुष्मेश्वर महादेव मंदिर (शिवाड़)
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यहाँ भगवान शिव का बारहवाँ एवं अंतिम ज्योतिर्लिंग अवस्थित है।
रामेश्वरम मंदिर
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खंडार तहसील में चंबल, बनास और सीप नदियों के संगम पर स्थित। कार्तिक पूर्णिमा पर मेला।
चौथ माता का मंदिर
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कंजर जाति की आराध्य देवी, चौथ का बरवाड़ा गांव में स्थित। करवा चौथ पर महिलाएँ पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं।
अन्य प्रमुख मंदिर
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धुंधलेश्वर का मंदिर: गंगापुर सिटी के पास, भाद्रपद कृष्ण नवमी पर मेला।
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हिचकी माता का मंदिर: सनवाड़ गांव में।
सीकर जिले के प्रमुख मंदिर
श्री खाटू श्याम जी मंदिर
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सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित। नींव मारवाड़ के राजा अजीतसिंह के पुत्र अभयसिंह ने रखी।
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यहाँ भगवान कृष्ण के स्वरूप श्याम जी के शीश की पूजा होती है, जिसकी मुखाकृति दाढ़ी-मूंछ वाली है।
जीण माता का मंदिर
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हर्ष की पहाड़ी (रेवासा, सीकर) पर पृथ्वीराज चौहान प्रथम के समय हट्टड़ ने बनवाया।
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ये चौहानों की कुलदेवी, शेखावटी की लोक देवी और मधुमक्खियों की देवी हैं। जन्म धांधू गांव में हुआ।
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इन्हें ढाई प्याले शराब चढ़ती है। चैत्र एवं आश्विन नवरात्रों में मेला लगता है। जीण माता का लोकगीत सबसे लंबा है।
हर्ष नाथ का मंदिर
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सीकर में हर्ष गिरी की पहाड़ियों पर, विग्रहराज द्वितीय के काल में निर्मित। इसे हर्ष भेरू/हर्ष महादेव भी कहते हैं।
अन्य प्रमुख मंदिर
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सूरनी धाम सूर्य मंदिर: श्रीमाधोपुर के सुराणा गांव में उत्तर भारत की एकमात्र सूर्यपीठ।
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भैरू जी का मंदिर: रींगस में।
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ओमल-सोमल मंदिर: सलेदीपुर में।
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झुंझार जी का मंदिर: स्यलोदड़ा गांव में 5 स्तंभों वाला मंदिर, रामनवमी पर मेला। जन्म इमलोहा (नीमकाथाना) में, प्रायः खेजड़ी वृक्ष के नीचे थान होता है।
सिरोही जिले के प्रमुख मंदिर
दिलवाड़ा के जैन मंदिर
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11वीं से 13वीं सदी के मध्य नागर शैली में सोलंकी कला के अद्भुत मंदिर।
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5 श्वेतांबर एवं 1 दिगंबर मंदिर: विमलवसहि, लूणवसहि, खारातारा वसहि (पार्श्वनाथ), महावीर स्वामी मंदिर, पित्तलहर (भामाशाह) मंदिर।
सिरोही/माउंट आबू के अन्य मंदिर
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रसिया बालम (कुंवारी कन्या मंदिर): दिलवाड़ा के पीछे तलहटी में।
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भद्रकाली माता मंदिर: ऋषिकेश मंदिर के रास्ते में प्राचीन मंदिर।
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ऋषिकेश मंदिर: उमरणी गांव में, भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर मेला।
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वशिष्ठजी का मंदिर: माउंट आबू में स्थित।
टोंक जिले के प्रमुख मंदिर
कल्याण जी का मंदिर, डिग्गी मालपुरा
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मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह के काल में निर्मित। मुस्लिम इसे कलंह पीर कहते हैं।
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भक्त तारकेश्वर मंदिर (जयपुर) से दंडवत लगाते हुए आते हैं।
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लोकगीत: “म्हारा डिग्गीपुरी का राजा थारे बाजे छे नोपत बाजा”।
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भाद्रपद एकादशी एवं वैशाख पूर्णिमा को विशाल मेला।
टोंक के अन्य प्रमुख मंदिर
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देवनारायण जी का मंदिर: मासी, बांडी व खारी नदी के संगम पर जोधपुरीया गांव में।
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गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर: बीसलपुर में।
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जलदेवी का मंदिर: टोडारायसिंह तहसील के बावड़ी गांव में।
उदयपुर जिले के प्रमुख मंदिर
जगत का अंबिका मंदिर
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इसे मेवाड़ का खजुराहो कहा जाता है।
जगदीश मंदिर, उदयपुर
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महाराणा जगतसिंह द्वारा 1651 ईस्वी में स्थापित। इसे सपने से बना मंदिर भी कहते हैं।
एकलिंग जी का मंदिर, कैलाशपुरी (उदयपुर)
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निर्माण बप्पा रावल ने 734 ईस्वी में करवाया। मेवाड़ के महाराणा स्वयं को एकलिंग जी का दीवान मानते हैं।
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शिवरात्रि पर विशाल मेला। चैत्र अमावस्या पर ध्वजा और हीरों का नाग चढ़ाने की रस्म होती है।
ऋषभदेव मंदिर, उदयपुर
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देवता को केसर चढ़ती है। श्वेतांबर-दिगंबर जैन, वैष्णव, भील, शैव सभी पूजा करते हैं।
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आदिवासी इन्हें काला जी (काला बावजी) कहते हैं। भील लोग कालिया बाबा की आण लेते हैं।
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वैष्णव धर्मावलंबी इन्हें विष्णु का अवतार मानते हैं। चैत्र कृष्ण अष्टमी-नवमी पर विशाल मेला।
आहड़ जैन मंदिर (उदयपुर)
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10वीं शताब्दी के जैन मंदिरों का समूह। यहाँ आचार्य जगच्चन्द्रसूरि को 12 वर्षों के तप उपरांत शासक जैत्रसिंह ने 'तपा' विरुद्ध प्रदान किया।
राजस्थान के अन्य प्रसिद्ध मंदिर (सारणी)
| मंदिर का नाम | स्थान |
|---|---|
| अद्भुतनाथ मन्दिर | चित्तौड़गढ़ का किला |
| अचलेश्वर महादेव मन्दिर | अचलगढ़, दिलवाड़ा (आबू) |
| चिन्तामणि मन्दिर | बीकानेर |
| चामुण्डा देवी मन्दिर | जोधपुर किला (जोधपुर) |
| दिगम्बर जैन मन्दिर | अलवर |
| धुनीनाथ मन्दिर | बीकानेर |
| धूलेश्वर मन्दिर | आबू |
| घाटेश्वर मन्दिर | बरौली (कोटा) |
| हर मन्दिर | बीकानेर (जूनागढ़ किले में) |
| जैमल मन्दिर | बीकानेर (जूनागढ़ किले में) |
| जम्बु मार्गेश्वर मन्दिर | बून्दी |
| कपार्दा के मन्दिर | रनकपुर (जोधपुर) |
| कान्तीनाथ जैन मन्दिर | अचलगढ़ (आबू) |
| लक्ष्मीनारायण मन्दिर | बीकानेर |
| लक्ष्मीनाथ जी मन्दिर | जैसलमेर |
| महामंगलेश्वर मन्दिर | बून्दी |
| नीलकंठ महादेव मन्दिर | अलवर |
| रक्तदन्तिका मन्दिर | सतूर (बून्दी) |
| सम्भावनाथ जैन मन्दिर | जैसलमेर |
| वरूण मन्दिर | बून्दी |
| सीमल माता का मन्दिर | बसंतगढ़ |
| बूढ़ादीत सूर्य मन्दिर | बूढ़ादीत |
| जटाशंकर महादेव मन्दिर | चित्तौड़गढ़ |
| कुंजनाथ स्वामी का मन्दिर | दिलवाड़ा |
| गोकुलनाथ मन्दिर | जयपुर |
| पारसनाथ मन्दिर | जैसलमेर |
| गंगश्याम जी का मन्दिर | जोधपुर |
| भूतनाथ मन्दिर | जोधपुर |
| रंगवाडी मन्दिर | कोटा |
| कपिलदेव जी मन्दिर | कोलायत |
| निम्बोरानाथ महादेव मन्दिर | पाली |
| सोमनाथ का मन्दिर | पाली |
| आत्मेश्वर महादेव मन्दिर | पुष्कर |
| रमावैकुण्ठ मन्दिर | पुष्कर |
| पार्वती मन्दिर | पुष्कर |
| नागेश्वर पार्श्वनाथ मन्दिर | उन्हेल |
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