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जैसलमेर का भाटी वंश: इतिहास, प्रमुख शासक और महत्वपूर्ण घटनाएँ

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By NotesMind
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राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित जैसलमेर का इतिहास वीरता, बलिदान और स्थापत्य कला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ का भाटी वंश स्वयं को यादव वंश से जोड़ता है और अपनी प्राचीन परंपराओं के लिए जाना जाता है। यह लेख जैसलमेर के भाटी राजवंश के उदय, विकास, प्रमुख शासकों और ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है।


भाटी वंश की उत्पत्ति

भाटी राजवंश को प्राचीन यादव वंश की शाखा माना जाता है। यह वही वंश है जिसे भगवान श्रीकृष्ण से जोड़ा जाता है।

  • भाटियों का प्रारंभिक शासन उत्तर-पश्चिम भारत में रहा।
  • उत्तरी सीमाओं की रक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण इन्हें "उत्तर भट किंवाड़" कहा गया।

प्रारंभिक स्थापना

  • भाटी वंश के प्रारंभिक शासक भट्टी ने लगभग तीसरी शताब्दी में भटनेर (वर्तमान हनुमानगढ़) क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित किया।
  • भट्टी के वंशजों को आगे चलकर भाटी कहा जाने लगा।

राजधानी का परिवर्तन

भाटी शासकों ने समय-समय पर अपनी राजधानी बदली, जो उनके संघर्ष और विस्तार की कहानी बताती है।

  1. भटनेर (हनुमानगढ़) – पहली राजधानी
  2. तनोट – दूसरी राजधानी (सीमा सुरक्षा हेतु)
  3. लौद्रवा (लोद्रवा) – तीसरी राजधानी
  4. जैसलमेर – चौथी और स्थायी राजधानी

रावल जैसल और जैसलमेर की स्थापना

जैसलमेर नगर की स्थापना (1155 ई.)

  • भाटी शासक रावल जैसल ने 12 जुलाई 1155 ई. को जैसलमेर शहर की स्थापना की।
  • उन्होंने इसे अपनी नई राजधानी बनाया।

जैसलमेर दुर्ग (सोनार किला)

  • इस किले का निर्माण पीले पत्थरों से हुआ है, इसलिए इसे "सोनार किला" कहा जाता है।
  • विशेष बात: इसमें चूने का उपयोग नहीं किया गया।
  • यह दुनिया के सबसे बड़े जीवित किलों में से एक है।

विजयराज और प्रारंभिक शासक

  • विजयराज को "विजयराज चूड़ाला" के नाम से जाना जाता था।
  • धनावा शिलालेख (1176 ई.) में उन्हें महाराजा कहा गया है।
  • उनके पुत्र भोज ने विदेशी आक्रमणकारियों से युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की।

जैसलमेर के प्रसिद्ध “ढ़ाई साके”

जैसलमेर का इतिहास अपने तीन प्रमुख साकों (जौहर और युद्ध) के लिए प्रसिद्ध है:

1. पहला साका (1308 ई.)

  • दिल्ली सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया।
  • महिलाओं ने जौहर किया और पुरुषों ने युद्ध में बलिदान दिया।

2. दूसरा साका (1352 ई.)

  • फिरोजशाह तुगलक के आक्रमण के समय हुआ।

3. अर्द्ध साका (1550 ई.)

  • कंधार के शासक अमीर अली ने आक्रमण किया।
  • रावल लूणकरण युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए।
  • इस बार जौहर नहीं हुआ क्योंकि अंततः भाटी विजयी रहे।

प्रमुख शासक और उनके कार्य

रावल घड़सी

  • गड़सीसर झील का निर्माण करवाया
  • यह जल संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है

रावल लक्ष्मण सिंह

  • जैसलमेर किले में लक्ष्मीनाथ मंदिर का निर्माण
  • स्वयं को भगवान का प्रतिनिधि मानकर शासन किया

रावल जैतसिंह

  • शांतिनाथ जैन मंदिर का निर्माण
  • बीकानेर के शासकों से संघर्ष

मुगल काल और भाटी वंश

अकबर के साथ संबंध (1570)

  • नागौर दरबार में भाटी शासक हरराय ने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार की
  • वैवाहिक संबंध स्थापित किए गए

अमरसिंह भाटी

  • सिंधु नदी का पानी "अमरकास नाला" के माध्यम से जैसलमेर तक लाए
  • यह एक महत्वपूर्ण जल परियोजना थी

अंग्रेजों के साथ संबंध

1818 की संधि

  • शासक मूलराज द्वितीय ने अंग्रेजों के साथ संधि की
  • इसके बाद जैसलमेर ब्रिटिश प्रभाव में आ गया

स्थापत्य और सांस्कृतिक योगदान

प्रमुख निर्माण

  • गणेश पोल
  • सूर्य पोल
  • गजविलास महल
  • सर्वोत्तम विलास

कला और साहित्य

  • पिंगल शिरोमणि जैसे ग्रंथों की रचना
  • स्थानीय कला को संरक्षण

1857 का विद्रोह और जैसलमेर

  • उस समय शासक रणजीत सिंह थे
  • उन्होंने अंग्रेजों का समर्थन किया
  • इसके बाद अंग्रेजों का प्रभाव और मजबूत हुआ

प्रशासनिक विकास

  • डाक व्यवस्था का विकास
  • चांदी के सिक्कों पर महारानी विक्टोरिया का नाम अंकित
  • विक्रम संवत को राजकीय संवत बनाया गया

अंतिम शासक और विलय

महारावल जवाहर सिंह

  • भाटी वंश के अंतिम शासक
  • उनके समय राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी

राजस्थान में विलय (1949)

  • 30 मार्च 1949 को जैसलमेर का राजस्थान में विलय हुआ

करौली का यादव वंश

  • स्थापना: विजयपाल यादव (1040 ई.)
  • प्राचीन नाम: गोपालपाल
  • तिमनगढ़ दुर्ग का निर्माण
  • 1817 में अंग्रेजों से संधि

भरतपुर का जाट वंश (संक्षेप में)

बदन सिंह

  • डीग के महलों का निर्माण

महाराजा सूरजमल

  • भरतपुर के सबसे महान शासक
  • 1761 में आगरा किले पर अधिकार
  • वीरता और स्वतंत्रता प्रेम के लिए प्रसिद्ध

निष्कर्ष

जैसलमेर का भाटी वंश राजस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
यह वंश न केवल अपनी वीरता और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि जल प्रबंधन, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए भी जाना जाता है।

भाटी शासकों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी अपने राज्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाए रखा, जो उनके कुशल नेतृत्व और रणनीति का प्रमाण है।

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