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राजस्थान प्रजामंडल आंदोलन का इतिहास: प्रमुख संस्थाएं, नेता और महत्वपूर्ण घटनाएं

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By NotesMind
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प्रजामंडल आंदोलन: प्रमुख  संगठन और अधिवेशन

राजस्थान और भारत की रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए प्रजामंडल आंदोलन एक महत्वपूर्ण कड़ी था। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (1927 ई.): इसकी स्थापना बॉम्बे (मुंबई) में हुई थी।
    • अध्यक्ष: दीवान रामचन्द्र राव।
    • उपाध्यक्ष: विजय सिंह पथिक।
    • सचिव: राजपूताना एवं मध्य भारत के लिए रामनारायण चौधरी को सचिव नियुक्त किया गया था।
  • राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद (1928 ई.): इसकी स्थापना 1928 में हुई।
    • प्रथम अधिवेशन: इसका पहला अधिवेशन 1931 ई. में अजमेर में आयोजित किया गया।
    • अध्यक्ष: इस अधिवेशन की अध्यक्षता रामनारायण चौधरी ने की थी।
  • कांग्रेस का रुख:
    • 1928 ई. (कलकत्ता अधिवेशन): मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार रियासतों में उत्तरदायी शासन की माँग की।
    • 1938 ई. (हरिपुरा अधिवेशन, गुजरात): सुभाष चन्द्र बोस की अध्यक्षता में कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर प्रजामंडल आंदोलनों को अपना समर्थन दिया।

 


विभिन्न प्रजामंडलों की स्थापना का कालक्रम

दिए गए नोट्स के अनुसार, विभिन्न वर्षों में स्थापित होने वाले प्रजामंडल और रियासती संगठन इस प्रकार हैं:

वर्ष

प्रजामंडल / रियासत

1931

जयपुर, बूंदी

1934

मारवाड़, हाड़ौती

1936

बीकानेर, धौलपुर

1938

मेवाड़, शाहपुरा, अलवर, भरतपुर, करौली

1939

कोटा, किशनगढ़, सिरोही

1942

कुंभलगढ़

1943

बाँसवाड़ा

1944

डूँगरपुर

1945

जैसलमेर, प्रतापगढ़

1946

झालावाड़


 

जयपुर प्रजामंडल (1931 ई.)

जयपुर प्रजामंडल राजस्थान का प्रथम प्रजामंडल था, जिसकी स्थापना रियासती जनता के अधिकारों की रक्षा और उत्तरदायी शासन की माँग के लिए की गई थी।

1. स्थापना और पुनर्गठन

  • संस्थापक: इसकी स्थापना 1931 ई. में कर्पूर चन्द्र पाटनी द्वारा की गई थी।
  • पुनर्गठन: शुरुआत में यह अधिक सक्रिय नहीं रहा, इसलिए 1936 ई. में जमनालाल बजाज ने इसका पुनर्गठन किया।
  • प्रमुख पदाधिकारी (पुनर्गठन के बाद):
    • अध्यक्ष: चिरंजीलाल मिश्र।
    • मंत्री: हीरालाल शास्त्री।

2. प्रमुख गतिविधियाँ और आंदोलन

  • शेखावाटी किसान आंदोलन: जयपुर प्रजामंडल ने शेखावाटी क्षेत्र के किसानों के हितों की रक्षा के लिए चल रहे 'शेखावाटी किसान आंदोलन' को अपना पूर्ण समर्थन दिया।
  • प्रथम अधिवेशन: प्रजामंडल का पहला बड़ा अधिवेशन 8 और 9 मई, 1938 ई. को आयोजित हुआ।
    • स्थान: नथमल का कटला (जयपुर)।
    • अध्यक्षता: इस अधिवेशन की अध्यक्षता जमनालाल बजाज ने की थी।
  • महिला भागीदारी: 10 मई, 1938 को महात्मा गांधी की धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी ने जयपुर में महिलाओं की एक विशाल सभा को संबोधित किया, जिससे महिलाओं में राजनीतिक चेतना जाग्रत हुई।

3. रियासत का दमन और सत्याग्रह

  • प्रजामंडल की बढ़ती लोकप्रियता और गतिविधियों से घबराकर जयपुर रियासत ने प्रजामंडल पर पाबंदी लगा दी।
  • प्रजामंडल के नेताओं ने इस पाबंदी का पुरजोर विरोध किया और अपनी आवाज उठाने के लिए सत्याग्रह प्रारंभ कर दिया।
  • इस आंदोलन के दौरान प्रमुख नेता जमनालाल बजाज को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद जनता का विरोध और अधिक तीव्र हो गया।

1. मोतीलाल दिवस (5 अप्रैल 1931)

5 अप्रैल 1931 को 'मोतीलाल दिवस' के रूप में मनाया जाता हॆ


2. जेंटलमैन एग्रीमेंट (17 सितम्बर 1942 ई.)

यह समझौता जयपुर रियासत और प्रजामंडल के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

  • किनके मध्य हुआ: जयपुर के तत्कालीन प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल और प्रजामंडल के अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री के बीच।
  • समझौते की प्रमुख शर्तें:
    • जयपुर रियासत में उत्तरदायी शासन व्यवस्था की स्थापना की जाएगी।
    • जयपुर रियासत दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों की सहायता नहीं करेगी।
    • रियासत ब्रिटिश भारत के किसी भी विद्रोही को गिरफ्तार नहीं करेगी और प्रजामंडल उसे शरण दे सकेगा।
    • प्रजामंडल को शांतिपूर्ण धरना, जुलूस और प्रदर्शन करने का अधिकार होगा।
    • मुख्य शर्त: प्रजामंडल 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग नहीं लेगा।

3. आजाद मोर्चा (गठन और कार्य)

जेंटलमैन एग्रीमेंट की उस शर्त से, जिसमें भारत छोड़ो आंदोलन में भाग न लेने की बात कही गई थी, प्रजामंडल के कुछ कार्यकर्ता असंतुष्ट थे।

  • गठन: प्रजामंडल के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं ने बाबा हरीशचन्द्र के नेतृत्व में 'आजाद मोर्चा' का गठन किया।
  • उद्देश्य: इस मोर्चे का मुख्य उद्देश्य 'भारत छोड़ो आंदोलन' में सक्रिय रूप से भाग लेना था।
  • अन्य प्रमुख सदस्य:
    • रामकरण जोशी
    • दौलतराम भण्डारी
    • गुलाब चन्द कासलीवाल
  • विलय: 1945 ई. में जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर आजाद मोर्चा का पुनः जयपुर प्रजामंडल में विलय कर दिया गया।

देवीशंकर तिवाड़ी 

जयपुर प्रजामंडल और राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था के एक प्रमुख व्यक्ति थे:

  • लोकवाणी समाचार पत्र: उन्होंने 1943 ई. में जमनालाल बजाज की स्मृति में 'लोकवाणी' नामक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया।
  • मंत्रिमंडल में भूमिका: 1946 ई. में उन्हें जयपुर रियासत में 'गैर-सरकारी मंत्री' बनाया गया, जो राजस्थान के इतिहास में पहली बार हुआ था।
  • RPSC अध्यक्ष: कालांतर में वे राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष बने और उनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा है।
  • जयपुर प्रजामंडल: वे जयपुर प्रजामंडल के अध्यक्ष पद पर भी रहे।

 


2. बून्दी प्रजामंडल

बून्दी रियासत में जन-जाग्रति लाने के लिए इस प्रजामंडल की स्थापना की गई थी:

  • संस्थापक: इसके प्रमुख संस्थापकों में नित्यानन्द, कांतिलाल चौथानी और ऋषिदत्त मेहता शामिल थे।
  • संगठन: यहाँ 'बून्दी देशी राज्य लोक परिषद' नामक संगठन सक्रिय था।
  • समाचार पत्र: ऋषिदत्त मेहता द्वारा 'राजस्थान' (साप्ताहिक) समाचार पत्र निकाला गया।
  • प्रकाशन: 1923 ई. से यह समाचार पत्र ब्यावर से प्रकाशित होता था और इसमें मुख्य रूप से हाड़ौती क्षेत्र की खबरें छपती थीं।

 


3. मारवाड़ प्रजामंडल (प्रारंभिक चरण)

मारवाड़ (जोधपुर) में राजनीतिक चेतना की शुरुआत संस्थाओं के माध्यम से हुई:

  • मरुधर हितकारिणी सभा: इसकी स्थापना 1918 ई. में चाँदमल सुराणा द्वारा की गई थी।
  • पुनर्गठन: 1923 ई. में जयनारायण व्यास द्वारा इस सभा का पुनर्गठन किया गया।
  • नाम परिवर्तन: पुनर्गठन के बाद इसका नाम बदलकर 'मारवाड़ हितकारिणी सभा' कर दिया गया।
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